कुछ ज्यादा ही उम्मीदें.. - कुछ ज्यादा ही उम्मीदें.. DA Image
15 नबम्बर, 2019|1:15|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कुछ ज्यादा ही उम्मीदें..

वह ऑपरेशन थिएटर में थीं। वहां ले जाते हुए ही डॉक्टर ने बहुत प्यार से समझा दिया था कि क्या-क्या तकलीफ हो सकती है? एनेस्थीसिया देने से पहले मुसकराते हुए डॉक्टर ने कहा था, ‘थोड़ा सह लो, बाकी सब ठीक हो जाएगा।’ ऑपरेशन के बाद उन्हें काफी तकलीफ हुई थी। लेकिन वह आराम से उसे झेल गई थीं। दूसरी ओर एक मरीज को डॉक्टर ने कह दिया था, ‘कुछ नहीं होना है। मामूली सी दिक्कत आएगी।’ ऑपरेशन के बाद उन्हें कोई खास तकलीफ नहीं हुई थी। लेकिन उनके पास शिकायतें ही शिकायतें थीं।
 
डॉ. लिकरमैन ने अपनी किताब ‘हैप्पीनेस इन दिस वर्ल्ड’ में लिखा है कि वह अपने मरीजों को दोनों तरह की बातें बताने के पक्ष में हैं। वह उन्हें अच्छा और बुरा जो भी हो सकता है उसे बता देते हैं। उससे मरीज दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार रहता है। लेकिन डॉक्टर का अंदाज उम्मीदों भरा होना चाहिए।
 
जब कोई डॉक्टर के पास जाता है, तो बड़ी उम्मीदें ले कर जाता है। उम्मीदें करना तो अच्छी बात है। लेकिन जरूरत से ज्यादा उम्मीदें ठीक नहीं हैं। न तो हमें ज्यादा उम्मीदें करनी चाहिए। और न ही डॉक्टर को ज्यादा उम्मीदें बंधानी चाहिए। दिक्कत तब होती है, जब हम बहुत ज्यादा उम्मीदों के साथ कहीं उतरते हैं। या कोई हमें ज्यादा ही उम्मीद बंधा देता है। एक को डॉक्टर ने अच्छा और बुरा दोनों बताया। उसे तकलीफ ज्यादा हुई, लेकिन उनका अनुभव खराब नहीं था। दूसरे को तकलीफ कम हुई लेकिन बेहद खराब एहसास हुआ। दोनों का फर्क उम्मीदों से जुड़ा हुआ था।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कुछ ज्यादा ही उम्मीदें..