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17 नबम्बर, 2019|8:25|IST

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जन प्रतिनिधियों की हरकतें

अपने जन प्रतिनिधियों की हरकतों से हम आजिज आ चुके हैं। अभी संसद में जो भी हुआ, वह शर्मनाक था। बैंक सेंचुरी को ‘बेल आउट’ करने का मामला था। उस पर बहस के दौरान हमारे प्रतिनिधियों ने क्या-क्या नहीं किया? वे प्लास्टिक की बोतलें फेंक रहे थे। नाम ले-ले कर गालीगालौज कर रहे थे। ये लोग आने वाली पीढ़ी के लिए क्या मिसाल कायम कर रहे हैं? राष्ट्रपति सुसीलो बाम्बीनो युधियानो से हालात संभाले नहीं जा रहे। उनकी तीन सहयोगी पार्टियों ने उनका साथ नहीं दिया। वे उनके खिलाफ बोल रहे थे। इस हालात से निपटने में उनके साथ एक औरत ही थी। संयोग से हमने तीन दिन पहले ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया है। शायद उसी औरत यानी श्रीमुलयानी इंद्रावती की वजह से उनकी सरकार की इज्जत बच सकी। इंद्रावती वित्त मंत्री हैं। उन पर चारों ओर से बेभाव की पड़ रही थी। लेकिन वह आराम से सबको ङोल रही थीं। अगर मंदी से यह देश निकल सका है, तो उसमें इंद्रावती की खास भूमिका है। लेकिन औरतों में राष्ट्रपति को खास भरोसा नहीं है। उन्हें अपनी सोच बदलनी चाहिए।  
जकार्ता पोस्ट

दुनियाभर के लिए मिसाल
संसद में भारतीय महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने वाला विधेयक दुनियाभर के लिए मिसाल है। आज भारत ने उसमें पहल की है, कल सारी दुनिया को यह करना होगा। हालांकि अभी उसे कानून बनने के लिए लंबा रास्ता तय करना है। लेकिन उस सिलसिले में भारतीय संसद एक कदम आगे तो बढ़ ही गई है। यह कोई मामूली बात नहीं है। यह पहला कदम बहुत आसान नहीं था। अब भी उस कदम का विरोध करने वालों की कमी नहीं है। यहां एक सवाल तो उठता ही है कि विधेयक को दोबारा तैयार करते हुए धर्म और जाति को मद्देनजर क्यों नहीं रखा गया?
गार्जियन, लंदन

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