भारत की बहुमूल्य संपदा है योग - भारत की बहुमूल्य संपदा है योग DA Image
14 नबम्बर, 2019|6:15|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

भारत की बहुमूल्य संपदा है योग

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का चौथा दिन वैज्ञानिक अध्यात्मवाद के नाम रहा। प्रतिभागियों ने ध्यान और योगनिद्रा को भी समझा। इस दौरान छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये।

महोत्सव में भारत माता मंदिर के संस्थापक स्वामी सत्यमित्रनंद ने कहा कि योग अंर्तज्योति को जला देता है। जिससे जीवन के कण-कण में व्याप्त परमाप्ता की अनुभूति व्यक्ति को होने लगती है। उन्होंने शांति कुंज के संस्थापक श्रीराम शर्मा आचार्य के वाक्य, ‘हम सुधरेंगे-युग सुधरेगा’ को गीता का सार बताते हुए देसंविवि को योग, संस्कृति एवं अध्यात्म की त्रिवेणी की संज्ञा दी।

उन्होंने कहा कि समत्वम् योग भारत की एक ऐसी बहुमूल्य संपदा है जिस पर भारत का हर व्यक्ति गर्व कर सकता है। समत्वम्  योग की संस्कृति देश की सबसे बड़ी संस्कृति है। अयोध्या के युवराज राम को रात्रि में राज्याभिषेक की सूचना मिलना और अगले दिन सुबह वन जाने के आदेश की सूचना मिलने पर उनका एक जैसा भाव समत्वं योग की उच्चता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि योग देह में रहते हुए देहि अर्थात आत्मा के दर्शन कराने में सक्षम है।  झारखंड से आये नूतन संजीवनी संस्थान के प्रमुख स्वामी मंगलतीर्थम् ने योग के वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। मंगलतीर्थ ने कहा कि हमारी भावनाओं के अनुसार ही हमारे मस्तिष्क का रंग बदलता है। मस्तिष्क के नकारात्मक विचार ही 80 प्रतिशत बीमारियों का कारण बनते हैं। सभी व्याधियों से निपटने के लिए उन्होंने योग निद्रा एवं ध्यान का सहारा लेने को कहा। ध्यान में मस्तिष्क का रंग आसमानी हो जाता है जो शांति का प्रतीक है। यही नहीं मात्र 20 मिनट का ध्यान हमारे मस्तिष्क में एल्फा किरणों की मात्र को बढ़ा देता है। उन्होंने ध्यान एवं नींद में अंतर स्पष्ट करते हुए बताया कि नींद में हमारा स्वयं पर नियत्रंण नहीं रहता, जबकि ध्यान में नियंत्रण बढ़ जाता है।

योगा एलायंस इंटरनेशनल नई दिल्ली के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी विद्यानंद ने रोजयोग, भक्तियोग, हठयोग आदि के सामांजस्य स्थापित करने की बात कही। उन्होंने बताया कि इन सबको मिलाकर रूपांतरण योग की स्थापना की जा रही है।

उन्होंने कहा कि योग छात्रों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का काम योग एलायंस संस्थान कर रहा है। स्वामी विद्यानंद ने इस कार्य में देव संस्कृति का सहयोग मांगा। इससे पूर्व विवि के छात्रों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:भारत की बहुमूल्य संपदा है योग