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21 नबम्बर, 2019|4:08|IST

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रेलवे लाइन के लिए भूमि नहीं देना चाहते किसान

रुड़की से देवबन्द के बीच 29 किलोमीटर रेलवे लाइन बिछाने के लिए रेल मंत्रलय किसानों की भूमि का अधिग्रहण करना चाहता है। लेकिन सरकारी नौकरी और अच्छे दामों के प्रलोभन के बावजूद किसान अपनी भूमि रेलवे को नहीं देना चाहते। अपनी जमीन जाने के डर से किसान इस रेलवे लाइन को बिछाने का विरोध कर रहे हैं।

रुड़की-देवबंद के बीच मंजूर 29 किलोमीटर रेलवे लाइन बिछाने के लिए जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव लम्बित था। राजस्व विभाग की स्वीकृति के बाद विधायी विभाग ने भी इसे हरी झंडी दे दी है। इससे रेलवे ट्रैक के लिए उत्तराखण्ड के लगभग एक दजर्न गांवों से किसानों की भूमि अधिग्रहण होनी है। इन गांवों में कस्बा झबरेड़ा, झबरेड़ी कलां, साल्हापुर, रहीमपुर, पनियाला, चांदपुर, नजूमपुर, पनियाली, लाठरदेवा, कुशालीपुर एवं शीतलापुर आदि शामिल है। वहीं उत्तर-प्रदेश के भी तेरह गांवों की जमीन इस रेलवे ट्रैक में अधिग्रहित होनी है।

इस तरह इस रेलवे लाइन के लिए हजारों बीघा भूमि रेलवे मार्ग के लिए अधिग्रहित की जानी है। 29 किलोमीटर रेलवे ट्रैक के बीच में दो रेलवे स्टेशन भी बनने हैं। इनमें से एक कस्बा  झबरेड़ा के पास, तो दूसरा उत्तर-प्रदेश के गांव भनेड़ा के पास बनाने का  प्रस्ताव है।

केन्द्रीय रेलवे मंत्री ममता बनर्जी ने रेल बजट में घोषणा की है कि किसी भी किसान की भूमि का रेलवे जबरदस्ती अधिग्रहण नहीं करेगा। जिस किसान की भूमि अधिग्रहीत की जाएगी, उस किसान को भूमि का उचित मुआवजा देने के साथ-साथ उस परिवार के एक सदस्य को शिक्षा के आधार पर रेलवे में नौकरी भी दी जायेगी। बावजूद इस प्रलोभन के रेलवे लाइन के लिए जिन किसानों की भूमि अधिग्रहीत की जानी है, उनमें से बड़ी संख्या में किसान अपनी जमीन नहीं देना चाहते।

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