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15 नबम्बर, 2019|1:21|IST

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गड़बड़ी नहीं तो जांच कैसी: निशंक

लघु जल विद्युत परियोजनाओं के आवंटन मामले में कांग्रेस की सीबीआई जांच की मांग को ठुकराते हुए मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने उल्टा सवाल दागा कि जब गड़बड़ी ही नहीं हुई तो फिर जांच कैसी । यदि कांग्रेस अपने शासनकाल के दौरान आवंटित की गई जल विद्युत परियोजनाओं की जांच कराना चाहती है तो फिर वह लिखकर दे, सरकार उस पर सीबीआई के लिए संस्तुति कर केंद्र को भेज देगी।

विधानसभा में पत्रकारों से बातचीत में जल विद्युत परियोजनाओं के आवंटन पर कांग्रेस पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने बिना किसी नीति के ही 400 मेगावाट की विष्णु प्रयाग, 330 मेगावाट की श्रीनगर समेत अन्य करीब 1000 मेगावाट की जल विद्युत परियोजनाएं आवंटित कर दीं। इनमें राज्य को 12 प्रतिशत फ्री बिजली के अतिरिक्त कोई अधिकार नहीं है।

यदि तत्कालीन कांग्रेस सरकार एक मेगावाट पर न्यूनतम 5 लाख भी कंपनियों से प्रीमियम लेती तो राज्य के खजाने में करीब 800 करोड़ की राशि आती। इसके विपरीत उनकी सरकार ने नीति के तहत ही परियोजनाओं का आवंटन किया। प्रति मेगावाट पांच लाख की प्रीमियम राशि भी ली। साथ ही कंपनियों से विद्युत नियामक आयोग की दरों पर बिजली खरीद का पहला हक भी राज्य सरकार का रहेगा। 

उन्होंने कहा कि कंपनियों के यदि पते फर्जी हैं तो उससे सरकार का खास लेना देना नहीं है। हां, यदि कोई कंपनी तय अवधि में परियोजना पूरा नहीं करती है तो उसे ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाएगा। साथ ही उसकी जमानत राशि जब्त हो जाएगी। आवंटित की गई परियोजनाओं को लेकर यदि किसी को शंका है तो वह 20 मार्च तक अपनी आपत्ति अपर सचिव ऊर्जा के पास जमा करा सकता है।

डा. निशंक ने साफ किया कि कांग्रेस के हर आरोप का जवाब सरकार के पास है। पर वह चर्चा से बचने के लिए हो हल्ला कर रही है। उन्होंने ऋषिकेश की स्टर्डिया डेवलपर्स के मामले में कहा कि यह जमीन न ही लीज पर है और न ही सरकारी। बीआईएफआर के निर्देश पर ही लैंड यूज चेंज किया गया। इस मौके पर उनके साथ भाजपा अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल व संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत भी मौजूद थे।

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