अब मुख्यमंत्री आए फ्रंटफुट पर - अब मुख्यमंत्री आए फ्रंटफुट पर DA Image
12 नबम्बर, 2019|2:35|IST

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अब मुख्यमंत्री आए फ्रंटफुट पर


शोरगुल में डूबी विधानसभा में राज्यपाल का अभिभाषण बिना चर्चा के पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री डा. निशंक ने मोर्चा संभालते हुए कांग्रेस का डटकर विरोध किया। पहली बार मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष डा. हरक सिंह रावत ने पलटवार करते हुए अतिरिक्त जोश का प्रदर्शन भी किया। तीन दिन से सदन के यक्ष प्रश्न बने विपक्ष के मुद्दों पर चर्चा को लेकर कांग्रेस व बसपा सदन में साफ-साफ बंटी दिखायी दी।

गुरुवार को हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित हुई। जल विद्युत परियोजनाओं व कैमिकल फैक्ट्री प्रकरण के बाद कांग्रेस ने लक्सर की सीमेंट फैक्ट्री मामले से सदन की गर्मी बरकरार रखी। अभिभाषण पर कोई चर्चा नहीं होने के कारण 12 मार्च को सदन नहीं चलेगा। अब 17 मार्च को मुख्यमंत्री सदन में बजट पेश करेंगे।
शून्यकाल से जारी तनातनी उस वक्त अपने चरम पर पहुंची जब  मुख्यमंत्री ने सदन में प्रवेश किया। सदन की घड़ी सवा बजा रही थी। इससे पूर्व कांग्रेस के विरोध के चलते सदन की कार्यवाही दो बार 35 मिनट तक स्थगित रही।

स्थगन के बाद सवा बजे शुरू हुई सदन की कार्यवाही के दौरान एकाएक मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप किया। मुख्यमंत्री के आते ही सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी पूरे जोशोखरोश के साथ अपनी सीटों पर खड़े होकर कांग्रेस की नारेबाजी का उसी की भाषा में जवाब दिया। भाजपा विधायक अपने हाथों में ऊर्जा नीति की प्रतियां लहरा रहे थे।

मुख्यमंत्री डा. निशंक ने कहा कि सरकार एक-एक जल विद्युत परियोजनाओं के बारे में सदन में तथ्य रखने के पक्ष में है। भाजपा सरकार भ्रष्टाचारियों के खिलाफ है। सरकार ने पारदर्शी ऊर्जा नीति के तहत परियोजनाओं का आवंटन किया है। निशंक के जोशीले वक्तव्य पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कई बार मेज थपथपाकर कांग्रेस की नारेबाजी का जवाब देने की कोशिश की।

निशंक ने कहा कि कांग्रेस जनता को गुमराह कर रही है। इस बीच, नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत ने लक्सर की सीमेंट फैक्ट्री को दी गयी एनओसी का मुद्दा उठाया। इस पर लगभग 15 मिनट तक सदन में महाभारत की स्थिति बनी रही। हालांकि, विस अध्यक्ष कपूर लगातार नियमों के तहत कांग्रेस को चर्चा में भाग लेने की अपील की। अपील को अनुसना करते हुए कांग्रेसी विधायकों ने भी कुछ दस्तावेज फाड़कर हवा में उछाले। अलबत्ता, कांग्रेस व भाजपा की खींचतान के दौरान बसपा विधायक अपनी सीट पर बैठे रहे।

गतिरोध के बीच, भाजपा विधायक केदार सिंह फोनिया व अजय टम्टा राज्यपाल के अभिभाषण के पक्ष में चंद सेकेंड ही बोल पाए। अध्यक्ष के बार-बार कहने के बावजूद विपक्ष ने अपने संशोधन भी पेश नहीं किए। हल्ले गुल्ले के बीच आश्वासन समिति का 15वां प्रतिवेदन सदन के समक्ष रखा गया। दोपहर डेढ़ बजे विधानसभाध्यक्ष ने 17 मार्च की सुबह 11 बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

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