नकलमाफिया को मौका तो खुद शिक्षा विभाग दे रहा - नकलमाफिया को मौका तो खुद शिक्षा विभाग दे रहा DA Image
10 दिसंबर, 2019|4:45|IST

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नकलमाफिया को मौका तो खुद शिक्षा विभाग दे रहा

योगेश्वर ऋषिकुल इण्टर कॉलेज की शिक्षिका सुपर्णा राय की डय़ूटी ज्योतिबा राव राजकीय विद्यालय में लगी है और स्वामी योगानन्द बालिका विद्यालय में भी। इसी तरह योगेश्वर ऋषिकुल इण्टर कॉलेज के ही के. के. सक्सेना की डय़ूटी शिया इण्टर कॉलेज में लगी है और इसी कॉलेज के कृष्ण कुमार सक्सेना ज्योतिबाराव राजकीय विद्यालय में डय़ूटी कर रहे हैं। योगेश्वर ऋषिकुल इण्टर कॉलेज की ही शरदा देवी सक्सेना राजकीय कन्या विद्यालय सरोसा-भरोसा में डय़ूटी कर रही हैं और शारदा सक्सेना शिया इण्टर कॉलेज में।

इससे साफ है कि कहीं नाम में मामूली अन्तर करके तो कहीं उसी नाम से एक ही शिक्षक की डय़ूटी दो-दो स्कूलों में लगाई गई है। कागजों पर यह डय़ूटी खुद जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से लगाई गई है। डय़ूटी चार्ट में इस तरह की गड़बड़ियों के ये सिर्फ दो ही नहीं, कई मामले हैं। गलतियाँ इतने तक ही सीमित नहीं हैं। तीन ऐसे भी शिक्षक हैं जिनके मूल कॉलेज के प्रधानाचार्य खुद कह रहे हैं कि इन नामों के शिक्षक ही उनके यहाँ नहीं है।

डय़ूटी चार्ट के मुताबिक के. पी. यादव, अवतार मिश्र और अक्षय अस्थाना एमकेएसडी इण्टर कॉलेज के शिक्षक हैं और उनकी परीक्षा डय़ूटी राजकीय इण्टर कॉलेज निशानतगंज में लगाई गई है। खुद एमकेएसडी इण्टर कॉलेज के प्रधानाचार्य वंशराज सिंह का कहना है कि इन नामों के कोई शिक्षक उनके यहाँ हैं ही नहीं। इससे साफ है कि शिक्षा विभाग ने खुद ही नकलमाफिया को मौका दे दिया है कि वह फर्जी कक्ष निरीक्षक तैनात करवा सके। डय़ूटी चार्ट की गड़बड़ियों का फायदा सीधे नकलमाफिया उठा रहा है।

जानकारों का कहना है कि शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से ही इस तरह का डय़ूटी चार्ट तैयार किया जाता है। इससे भ्रम की स्थिति बनी रहे और इसकी आड़ में मनचाहे कक्ष निरीक्षक तैनात करवाए जा सकें। जहाँ एक ही शिक्षक की दो स्कूलों में डय़ूटी लगा दी गई है तो यहाँ तय है कि कोई शिक्षक दोनों जगह डय़ूटी कर नहीं सकता। एक जगह वह खुद कर रहा होगा और दूसरे स्कूल में कोई और जा रहा होगा।

सबसे अहम सवाल तो यह है कि कुछ जगह यह डय़ूटी लगाते वक्त मामूली अन्तर भी किया गया है। इससे भी गलत मंशा जाहिर होती है। इसी तरह तीन शिक्षकों के स्कूलों के मूल नाम लिखे गए हैं वे वहाँ के शिक्षक ही नहीं हैं तो सवाल यह उठता है कि आखिर इनके स्कूल का नाम गलत क्यों लिखा गया? ऐसे ही एक और शिक्षक हैं राम प्रताप सिंह। डय़ूटी चार्ट के मुताबिक वह दिगम्बर जैन इण्टर कॉलेज के शिक्षक हैं और जगन्नाथ साहू इण्टर कॉलेज में उनकी डय़ूटी लगी है। वास्तव दिगम्बर जैन इण्टर कॉलेज में इस नाम का कोई शिक्षक नहीं है।

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