पहाड़ की तकदीर बदल सकता है कम्युनिटी बेस्ड टूरिज्म - पहाड़ की तकदीर बदल सकता है कम्युनिटी बेस्ड टूरिज्म DA Image
21 नबम्बर, 2019|4:09|IST

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पहाड़ की तकदीर बदल सकता है कम्युनिटी बेस्ड टूरिज्म


पलायन के चलते एक-एक कर खाली हो रहे प्रदेश के पर्वतीय गांवों लिए कम्युनिटी बेस्ड टूरिज्म एक नई उम्मीद लेकर आया है। इसके जरिये स्थानीय लोग न केवल अपने घरों की ओर लौट रहे हैं बल्कि देश विदेश के पर्यटकों को होम स्टे एकमोडेशन उपलब्ध करा कर आर्थिकी का जरिया भी बना रहे हैं।

कुमाऊं के विंसर क्षेत्र में विलेज वे द्वारा शुरू की गई होम स्टे एकमोडेशन स्कीम के बाद अब जीबी पंत संस्थान ने भी गढ़वाल क्षेत्र के त्रिजुगीनारायण एवं सिरसी गांवों में इस सेवा को शुरू करने की पहल की है। इसके तहत स्थानीय लोग देश-विदेश से आये पर्यटकों को उचित दरों पर सभी सुविधाएं उपलब्ध करा कर अपने घरों में ठहराने की व्यवस्था करते हैं और वषों से खाली पड़े ये पारंपरिक घर उनकी आर्थिकी का जरिया बनते हैं।

गोविंद वल्लभ पंत पर्यावरण विकास संस्थान की गढ़वाल इकाई के वरिष्ठ शोधार्थी अभय बहुगुणा ने बताया कि विलेज वे द्वारा कुमाऊं में चलाई गई इस स्कीम की सफलता के बाद उनके संस्थान ने भी गढ़वाल क्षेत्र में इस सेवा को शुरू करने की पहल की है। उन्होंने बताया कि इस स्कीम के तहत पहले चरण में त्रियुगीनारायण एवं सिरसी गांवों में पांच-पांच घरों को चुना गया है और उन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इसी के तहत ग्रामीणों को विंसर वन्य जीव विहार क्षेत्र में भ्रमण के लिए ले जाया गया जहां ग्रामीण बड़ी संख्या में होम स्टे एकमोडेशन को अपनी आर्थिकी का जरिया बना रहे हैं। संस्थान के प्रभारी वैज्ञानिक डा आर के मैखुरी बताते हैं कि यदि होम स्टे एकमोडेशन स्कीम को बढ़ावा दिया जाय तो यह सेवा प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो सकती है। इस तरह के प्रयासों से न केवल स्थानीय लोगों को पर्यटन का लाभ मिल सकेगा बल्कि गावों को रोजगार से भी जोड़ा जा सकेगा।

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