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10 दिसंबर, 2019|4:09|IST

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कान पर दें ध्यान

युवा आइपॉड, एमपी3 और मोबाइल पर इयरफोन से तेज संगीत सुनने के शौकीन होते हैं। इयरफोन से घंटों तेज आवाज में संगीत सुनने के शौकीन इन युवाओं के कानों ने जवाब देना शुरू कर दिया है। आजकल अस्पतालों में रोज इस तरह के मरीज पहुंच रहे हैं जिनमें बहरेपन की समस्या होती है।

उनके इसी शौक के चलते सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती है और स्थिति ऐसी भी आती है जब उन्हें सुनाई देना बिल्कुल बंद हो सकता है। यूं तो बहरापन कई कारणों से होता है। लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक जब कोई व्यक्ति तेज आवाज लगातार सुनता है तो उसे धीमी आवाजें सुनाई देना बंद हो जाती हैं।

आमतौर मोबाइल फोन के साथ स्टीरियो वाले इयरफोन जोड़कर सुने जाने वाले संगीत में कानों के लिए सुरक्षित ध्वनि नियंत्रण जैसी व्यवस्था की बजाय इस फीचर को लाउड बनाने पर जोर रहता है। इसलिए जरूरी है कि इसका प्रयोग कम-से-कम ही करें। 

- वॉल्यूम को खुद ही नियंत्रित रखें। फोन पर भी अपने जरूरत भर की बात करें व वार्तालाप संक्षिप्त रखें।

- मोबाइल पर यदि आप (हेडसेट) कर्ण यंत्र व माइक्रोफोन प्रयोग करें तो यह बुरा नहीं है। पर देखा गया है कि युवा इतनी तेज इयरफोन की आवाज रखते हैं कि वह आवाज पड़ोस के व्यक्ति का भी ध्यान भंग करती है। ध्यान रखें कि इयरफोन के जरिए बेहद तेज आवाज में संगीत नहीं सुनना कानों के लिए खतरनाक होता है। आवाज आपके अलावा आपके पड़ोसियों को परेशान न करे, इसका भी ध्यान रखना जरूरी है।

- ऐसी अच्छी कंपनी का मोबाइल खरीदें जिसके इयरफोन में आवाज को कानों के लिए सुरक्षित रूप में नियंत्रित किया गया हो।

- अकसर देखा गया है कि सोने के समय युवा इयरफोन कान में ठूंस कर संगीत सुनते-सुनते सो जाते हैं। यह सही नहीं है। रात की शांति में सामान्य वॉल्यूम भी तेज सुनाई पड़ता है। इसलिए इसका भी ध्यान रखें।

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