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10 दिसंबर, 2019|4:34|IST

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बसंत देखना है तो जोशीमठ आ जाइए

बसंत देखना है तो जोशीमठ आ जाइए। चारों ओर सेब, नाशपाती, खुमानी के पेड़ों पर फूलों को इतराते देख ऐसा लग रहा है कि, प्रकृति ने इस बार बसंत की सारी बहार जोशीमठ पर लुटा दी है। देर से ही सही पर जोशीमठ में गिरी बर्फ ने इस बार बसंत की रंगत में चार चांद लगा दिये हैं। सेब, नाशपाती, आडू, खुमानी के वृक्ष फूलों से लकदक हैं।

फल बागानों में गुलाबी और नीलिमा लिए फूलों से लदे पेड़ों को देखकर किसी दूसरी दुनिया में आ जाने का आभास हो रहा है। जहां नजर जाती है बस आडू, खुमानी, सेब और नाशपाती के फूलों भरे पेड़ नजर आ रहे हैं। स्थानीय निवासी नागेंद्र सकलानी कहते हैं कि वर्षो बाद जोशीमठ में पेड़ों पर इस कदर फूल आए हैं। यदि ओले न गिरे तो इस बार इलाके में फलों की फसल अच्छी होगी।

बागवान गौर सिंह कुंवर कहते हैं, फरवरी में हुए हिमपात से इस बार हमारे वृक्षों से सोना उगलेंगे। जिस तरह जमकर फूल खिले, फल भी खूब आएंगे।  जोशीमठ चमोली जनपद में सेब, नाशपाती, आडू, खुमानी और चूलू के फलों का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र है।

उद्यान विभाग के आंकड़े बताते हैं कि, यहां हर साल 20 हजार मीट्रिक टन से अधिक का सेब का उत्पादन होता है। बसंत की छटा इस समय जोशीमठ के बागानों में ही नहीं, निचली घाटियों के वनों में भी बुरांश आदि खिलने से बसंत यौवन पर पहुंच गया है। 

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