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जय हो रहमान-गुलजार

मुंबई की पृष्ठभूमि पर आधारित ब्रिटिश निर्दशक डैनी बॉएल की फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनयर’ 81वं ऑस्कर पुरस्कार समारोह मं छा गई। फिल्म को विभिन्न श्रणियों मं आठ पुरस्कार मिल हैं। ‘स्लमडॉग मिलियनयर’ भारतीय राजनयिक विकास स्वरूप की पुस्तक ‘क्यू एंड ए’ पर आधारित है।ड्ढr करीब साढ़े सात-पौने आठ बजे के बीच ऐलान हुआ-बेस्ट एडॉप्टेड स्क्रीनप्ले स्लमडॉग मिलियनेयर के लिए सिमोन बोफाए को और करोड़ों लोगों की सांस में सांस आई। चलो वह कथित लीक सूची एक जगह तो गलत साबित हुई। फिर रसुल पोक्कुटी की बारी आई।ड्ढr ड्ढr वो अवाक थे। उनके साथ सार हिन्दुस्तानी अवाक। उनकी जबान उनके जज्बात का साथ नहीं दे पा रही थी। पहली बार किसी हिन्दुस्तानी तकनीशियन को इस अवार्ड से नवाजा जा रहा था। कांपती आवाज और थरथराते होठों से उन्होंने यह सम्मान देश के नाम किया। बेस्ट शार्ट डॉक्यूमेंटरी में अपनी पिंकी की स्माइल ने बाजी मारी। फिर आई वह घड़ी जिसका सबको इंतजार था। बेस्ट ओरिानल म्यूजिक। सब दिल थामे थे.. आंखें बंद. रहमान-हां! रहमान-न!! और हां, रहमान ही!!! फिर क्या.. एसएमएस आने और जाने लगे-ाय हो! फिर बेस्ट ओरिानल सांग और लिरिक्स। लेकिन इससे पहले जो हुआ उसने पूर कोडक थिएटर को अपनी आगोश में ले लिया। ‘ओ साया’ और ‘जय हो’ की तान गूंजी। पूरा हाल मुगध। चेहरों पर आह और वाह के भाव। इतना साफ था कि अवार्ड मिले या न मिले, रहमान क्ष द बेस्ट। लेकिन यह क्या, यहां भी रहमान। हां, इस बार गुलजार साहब का साथ भी था। घड़ी की सुइयां सवा दस से ऊपर जा चुकी थीं। स्लमडॉग की झोली सात अवार्डो से मालामाल हो चुकी थी। अब आखिरी पायदान की बारी थी। बेस्ट पिक्चर भी स्. स्स्ससस. स्लमडॉग..! और फिल्म की पूरी टीम स्टेा पर। सार चेहर हिन्दुस्तानी। जश्न भी उन्हीं का। पुरस्कारों की घोषणा और दिल्ली, हरियाणा, बिहार व महाराष्ट्र में फिल्म टैक्स फ्री ।ड्ढr ड्ढr पिंकी ने भी हंसाया : भारत मं बनी डॉक्युमंट्री फिल्म ‘स्माइल पिंकी’ को भी ऑस्कर पुरस्कार स नवाजा गया। मिर्जापुर की पिंकी की जिंदगी की कहानी पर बनी इस फिल्म को बस्ट शॉर्ट डॉक्यूमंट्री का ऑस्कर पुरस्कार मिला है। ..हीं हीं हंस देले पिंकिया के पापाड्ढr सुरोीत चैटर्ाी वाराणसीड्ढr पहाड़ियों से घिर रामपुर ढबहीं गांव के खोरिया क्षेत्र में दूर से ही ढोल-नगाड़ों की आवाा सुनायी पड़ रही थी। पास जाने पर वहां नाचते दिख रहे ग्रामीण गा रहे थे ‘..हीं हीं हीं हीं हंस देले पिंकिया कऽ पापा’। जश्न मना रहे कई लोग एक-दूसर को इस अंदाज में अबीर-गुलाल लगा रहे थे जसे होली आज ही हो। पिंकी की मां शिमला देवी के पैर मानो जमीन पर पड़ ही नहीं रहे थे। यह सब तब हो रहा था जब पिंकी के एक रिश्तेदार के तेरही भोज का आयोजन बगल के गांव सरिया में था और वहां आने वाले लोग ढबहीं में आ जुटे।मिर्जापुर के अहरौरा स्थित इस गांव में सोमवार की सुबह से लेकर शाम तक यही नाारा था। लेकिन किसी भी ग्रामीण को न तो ऑस्कर अवार्ड के अर्थ के बार में पता था और न ही उसका महत्व। सभी की नजर में यह पुरस्कार पिंकी के गांव में खुशहाली लाने का संकेत रहा। ग्राम प्रधान सुशीला देवी के घर में डिश टीवी पर अपनी ‘पिंकिया’ और उसके बाऊ ‘राजेनरा’ को देखने शिमला देवी संग लगभग पूरा कुनबा जुटा था।ं

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