कोलेस्ट्रॉल - कोलेस्ट्रॉल DA Image
17 नबम्बर, 2019|1:05|IST

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कोलेस्ट्रॉल

कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए जरूरी तत्व होता है। यह मोम सदृश तत्व होता है जो सभी जीवित प्राणियों के शरीर में प्राकृतिक रूप में मौजूद होता है। आपके शरीर को बेहतर तरीके से काम करने के लिए एक निश्चित मात्र में कोलेस्ट्रॉल की आवश्यकता होती है। इसका मुख्य काम शरीर में बाइल एसिड्स, स्टीरॉयड हार्मोन्स और अनेक वसा को समाहित करने वाले विटामिनों का निर्माण करना होता है। कोलेस्ट्रॉल शब्द ग्रीक शब्द कोले और और स्टीयरियोज(सॉलिड) और इसमें केमिकल सफिक्स ओल लगा हुआ है। 1769 में फ्रेंकोइस पुलीटियर दी ला सैले ने गैलेस्टान में इसे ठोस रूप में पहचाना था। 1815 में केमिस्ट यूजीन चुरवेल ने इसका नाम कोलेस्ट्राइन रखा था। इनसान के खून में कोलेस्ट्रॉल के आ मिलने के दो स्नोत होते हैं, पहला रोजमर्रा की डाइट से, दूसरा लीवर के प्रोडक्शन द्वारा। कोलेस्ट्रॉल की अधिकता या कमी से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। वहीं अधिक कोलेस्ट्रॉल आर्टरी में जमा हो जाता है तो वह उसको ब्लॉक कर देता है। अगर कोई आर्टरी, जो आपके हृदय को खून की सप्लाई करती है, ब्लॉक हो जाए, तो हार्ट अटैक हो सकता है। अगर दिमाग को खून पहुंचाने वाली कोई आर्टरी ब्लॉक हो जाए, तो पक्षाघात हो सकता है। सच तो ये है कि कोलेस्ट्रॉल की शरीर में जितनी अधिकता होगी, हृदय रोग और पक्षाघात की संभावना उतनी ज्यादा होगी। इसलिए इसका निश्चित मात्र से बढ़ना सेहत के लिए खतरनाक
 होता है।
हर कोलेस्ट्रॉल सेहत के लिए नुकसानदायक नहीं होता। हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को एलडीएल (लो डेंस्टि लीपोप्रोटीन) और स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहतर कोलेस्ट्रॉल को एचडीएल (हाइ डेंस्टि लीपोप्रोटीन) कहा जाता है। हानिकारक कोलेस्ट्रॉल की वजह से ही आर्टरी ब्लॉक हो जाती हैं। एलडीएल की मात्रा ज्यादा होने और एचडीएल की मात्रा कम होने से हृदय रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।

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