केदारनाथ सेंचुरी समाप्त की जाए - केदारनाथ सेंचुरी समाप्त की जाए DA Image
20 नबम्बर, 2019|11:49|IST

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केदारनाथ सेंचुरी समाप्त की जाए

केदारनाथ वन्य जीव विहार सेंचुरी क्षेत्र को समाप्त कर ग्रामीणों को उनके पारंपरिक वन्य अधिकार देने की मांग को लेकर जन प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी से भेंट की। डीएम को अवगत कराया कि वन विभाग सेंचुरी क्षेत्र के मूल उद्देश्य को बचाने में नाकामयाब रहा है इसलिए इसे समाप्त कर ग्रामीणों के पुश्तैनी हक हकूक बहाल किए जाएं।
केदारनाथ पशु विहार प्रभावित संघर्ष समिति के संयोजक मंडल के पदाधिकारियों ने जनपदवासियों के हक-हकूकों की बहाली न होने पर डीएम के समक्ष आक्रोश प्रकट किया।

संयोजक मंडल ने बताया कि चमोली व रुद्रप्रयाग स्थित केदारनाथ वन प्रभाग क्षेत्र को कस्तूरा मृग परिरक्षणार्थ वर्ष 1972 में पशु विहार क्षेत्र घोषित किया था। वर्ष 1982 में चमोली जनपद के कांचुला खर्क में कस्तूरा मृग प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया।

2000-01 से 2009-10 के लिए इस पशु विहार के संरक्षण की प्रबंध योजना भी तैयार की गई, लेकिन जिस जनता ने इन वनों को उगाया, उसे इस बारे में कोई जानकारी ही नहीं दी गई। पशु विहार घोषित होने के बाद स्थानीय जनता के सभी वन अधिकार छीन लिए गए और जनता को इन वनों से घास, चारापत्ती आदि लाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। 

 प्रतिनिधिमंडल में स्यूंण बेमरू मठ झड़ेथा विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष बहादुर सिंह रावत, प्रेम सिंह सनवाल, मोहन सिंह रावत, कलावती देवी, उमाशंकर बिष्ट, मीना किमोठी, आशा नेगी, बीमा बिष्ट, अब्बल सिंह राणा, केदार सिंह घरिया शामिल थे।

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