Why wreak chaos, then settled in full Pataudi clan Taimoor - हंगामा है क्यों बरपा, तैमूर में तो बसा पूरा पटौदी खानदान DA Image

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हंगामा है क्यों बरपा, तैमूर में तो बसा पूरा पटौदी खानदान

हंगामा है क्यों बरपा, तैमूर में तो बसा पूरा पटौदी खानदान

बरेली। पंकज वत्स

इन दिनों लोगों के जुबान पर अपने बच्चे का नाम हो या न हो, सैफीना के बच्चे का नाम जरूर है। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने बच्चे का नाम तैमूर रख लिया। लोग इसे मुस्लिम शासक तैमूर लंग से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं है। तैमूर के इस शब्द में पूरा पटौदी खानदान का नाम बसा है।

दरअसल, पटौदी के नवाबों का इतिहास 1804 से शुरू होता है। उस समय अफगानी पशतून तलब खान एक कबीले का सरदार हुआ करते थे। दूसरे एंग्लो-मराठा युद्ध में उन्होंने वीरता का परचम लहराया था। उनकी वीरता से प्रभावित होकर अंग्रेजों ने उन्हें नवाब की उपाधि से नवाज़। लोक कलाओं और शेरो-शायरी से खासा लगाव होने के कारन बाद में वे फैज तलब खान के नाम से भी मशहूर हुए। कालान्तर में उन्होंने उत्तर भारत में पटौदी स्टेट के नाम से अपना छोटा सा साम्राज्य खड़ा किया।

ये तो हुआ इतिहास अब जरा इनके बाद के नवाबों के नाम पर रौशनी डालिये। बाद के नवाबों के नाम इस प्रकार हुए, अकबर अली सिद्दीकी, मोह्हमद अली सिद्दकी, मुख्तार सिद्दकी अली खान, मोहम्मद सिद्दीकी खान आदि। सबसे आखिरी नवाब हुए मंसूर अली खान, जिन्हें हम नवाब पटौदी के नाम से भी जानते हैं।

ऐसे बना तैमूर शब्द :

अब इन नामों पर गौर करें तो पहले नवाब तलब खान के नान का ‘त यानि अंग्रेजी का ‘टी, दूसरे नवाब अकबर अली का ‘अ यानि अंग्रेजी का ‘ए, मुख्तार का मु और आखिरी नवाब के नाम से मंसूर को इन अक्षरों में जोड़कर तैमूर शब्द बना। ध्यान दें पहले तीन शब्द से तैमू और मंसूर शब्द के फ्यूजन से बना शब्द है तैमूर। तो हुआ न पूरे खानदान का नाम।

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