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ग्रामीणों का भविष्य सवांरने में जुटे आईटी पेशेवर

कर्नाटक के कूननप्पालू गांव के बच्चे हर सप्ताहांत बड़ी बेसब्री से अपने कुछ मेहमान शिक्षकों का इंतजार करते हैं। ये शिक्षक देश में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) का प्रमुख केंद्र बन चुके बेंगलुरू से आकर इन बच्चों को गणित, अंग्रेजी और विज्ञान जैसे अहम विषय पढ़ाते हैं।

कूननप्पालू  गांव बेगलुरु से 120 किलोमीटर की दूरी पर है। इस गांव में एक सरकारी स्कूल है जहां 45 बच्चे पढ़ाई करते हैं। पांचवीं कक्षा तक इस स्कूल में महज एक शिक्षक है। परंतु ‘समायते फाउंडेशन’ ने इन बच्चों को भविष्य सवांरने का काम शुरू किया है।

यह संगठन बेंगलुरु के कुछ नौजवान आईटी पेशेवरों ने बनाया है जिन्होंने इन बच्चों की मदद का बीड़ा उठाया है। ये पेशेवर इन 45 बच्चों के साथ ही बगल के गांव के एक अन्य स्कूल के 40 बच्चों को भी पढ़ा रहे हैं। ‘समायते फाउंडेशन’ के संस्थापक सदस्य अरुण मुने गौड़ा ने कहा, ‘‘यह लंबी परियोजना है। हम अल्पकालिक उपलब्धियों को नहीं देख रहे हैं। कुछ वर्षों में हम यह कह सकते हैं कि ग्रामीण बच्चों में पढ़ने ओर पढ़ाने का एक नया आवेश पैदा हो गया है।’’

इस संगठन की नींव हासन स्थित मालनद इंजीनियरिंग कॉलेज के छह छात्रों ने रखी थी। हालांकि बाद में ये सभी पेशेवर बेंगलुरु पहुंच गए। आज इस संगठन के 12 सक्रिय सदस्य हैं। एक आईटी कंपनी में कार्यरत और संगठन के सचिव संदेश कुमार राय का कहना है, ‘‘यह संगठन बुद्धिमान और उत्साहित नौजवानों द्वारा गठित किया गया है, जिनका ध्यान निचले तबके और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को आधुनिक शिक्षा मुहैया कराना हैं।’’

इसी वर्ष जनवरी में इस संगठन ने मुथुराज नाम के एक अध्यापक की निुयक्ति की है जो इन ग्रामीण बच्चों को पढ़ा रहा है। इस शिक्षक को वेतन इसी संगठन की ओर से दिया जा रहा है।

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  • Web Title:बेंगलुरु, आईटी, सूचना एवं प्राद्योगिकी