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तमिल विस्थापितों का दर्द देख आहत हूं

तमिल विस्थापितों का दर्द देख आहत हूं

संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) के महासचिव बान की मून ने तमिलों के कैंप का दौरा करने के बाद कहा कि मैं तमिल विस्थापितों का दर्द देख बेहद आहत हूं। उन्होंने शनिवार को देश के सबसे बड़े विस्थापित कैंप मेनिक फॉर्म का दौरा करने के बाद बेहद ही भावुक होकर कहा।
 
श्रीलंका के उत्तर में स्थित मेनिक फॉर्म में करीब 2 लाख तमिल विस्थापित हैं। उन्होंने कहा कि कैंप का दौरे के दौरान मैंने कई घायल लोगों को भी देखा। मून ने कैंप में करीब 20 मिनट का समय व्यतीत किया।
 
उन्होंने कहा कि यह महाविपत्ति जैसी स्थिति है। पूरे विश्व समुदाय को इन लोगों के भले के लिए आगे आने आना पड़ेगा और युद्धस्तर पर काम करना पड़ेगा।
 
उल्लेखनीय है कि श्रीलंका के राष्ट्रपति महिदा राजपकसे ने शुक्रवार को कहा था कि इस वर्ष के अंत तक तमिल विस्थापितों को बसा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अभी सेना के जवान इलाके में बिछे बारूदी सुरंगों को हटाने का काम कर रहे हैं।
 
दौरे के दौरान मून ने एक अस्पताल का दौरा भी किया जहां 100 से अधिक घायल तमिल भर्ती हैं। ‘कल्याणकारी गांव’ कहे जाने वाले इस कैंप को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रखा गया है। मून ने इस बात से इनकार किया कि तमिलों को कैंप में भारी सुरक्षा के बीच उन्हें वहां रोके रखने के लिए किया गया है।
 
मून ने कहा कि तमिलों को वहां इसलिए रखा जा रहा है कि श्रीलंका सरकार उन्हें दोबारा से बसा सके। उन्होंने कहा कि श्रीलंका सरकार ने यही वादा किया है। लेकिन श्रीलंका सरकार अकेले ये सब नहीं कर सकती, इसलिए इस कमी को यूएन पूरा करेगा।
 
माना जा रहा है कि मून शनिवार शाम राजपकसे से मिलकर मानवाधिकार संगठनों को तमिल कैंपों में बिना किसी रोक टोक के प्रवेश की अनुमति देने की गुहार लगाएंगे। वह यह भी कहेंगे कि तमिलों को रष्ट्र के एक अभिन्न अंग के रूप में श्रीलंका सरकार स्थापित करे। उन्होंने कहा कि कम से कम 3 लाख तमिल बेघर हो गए हैं और उनका इलाका बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है, इसलिए श्रीलंका सरकार के साथ-साथ पूरे विश्व समुदाय को मदद के लिए आगे आना होगा।

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  • Web Title:एजेंसी