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जीवन शैलीहाइपर-एसिडिटी में राहत मिलेगी करें धनुरासन

Wed, 15 Aug 2012 03:09 PM
हाइपर-एसिडिटी में राहत मिलेगी करें धनुरासन

आजकल एसिडिटी की शिकायत करने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। खाने-पीने का सही समय न होना और कई ऐसे कारण हैं जो आपको इस समस्या की ओर ले जाते हैं। कुछ उपाय करके आप इससे बचे रह सकते हैं।

यह एक ऐसा उदर रोग है, जो आमाशय में अम्ल की मात्रा बढ़ जाने से उत्पन्न होता है। इस रोग में पाचक रस अनियंत्रित ढंग से बढ़ जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को अनेक परेशानियों से दो-चार होना पड़ता है। गलत जीवनशैली और फास्ट तथा जंक फूड के इस जमाने में लगभग हर व्यक्ति इस समस्या से पीड़ित नजर आता है।

रोग के लक्षण
पेट व छाती में जलन, खट्टी डकारें आना, पेट में दर्द, भारीपन, गैस की शिकायत, गले में जलन, कब्ज, अपच आदि। इस रोग का प्रमुख कारण हमारी गलत आदतें तथा मानसिक तनाव है। योग के नियमित अभ्यास से हम इस रोग के सभी प्रमुख कारण-आरामतलबी, व्यायाम की कमी, मानसिक तनाव तथा भोजन के असंतुलन पर नियंत्रण कर लेते हैं। हाइपर एसिडिटी को दूर करने में यौगिक क्रियाएं काफी फायदेमंद साबित होती हैं।

आसन
इसके समाधान हेतु धनुरासन, पवनमुक्तासन, वज्रासन, शशांकासन, मण्डूकासन, योगमुद्रा, भुजंगासन आदि बेहद कारगर हैं। पवनमुक्तासन के 10-12 चक्रों का प्रतिदिन अभ्यास करने मात्र से यह समस्या काफी हद तक दूर हो जाती है।

धनुरासन की अभ्यास विधि
पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। दोनों पैरों को घुटने से मोड़ लें। घुटनों तथा पंजों के बीच में एक फुट की दूरी बनाएं। इसके बाद पैर के पंजे या अंगूठे को पकड़कर (हाथों से) सिर-धड़, जांघें तथा घुटनों को जमीन से यथासंभव ऊपर उठाएं। इसके पश्चात थोड़ी देर (आरामदायक समय तक) इस स्थिति में रुकें। फिर वापस पूर्व स्थिति में आएं। इसकी तीन-चार आवृत्तियों का अभ्यास करें।

सावधानियां
हार्निया तथा अल्सर से पीड़ित लोग इसका अभ्यास न कर पवनमुक्तासन का अभ्यास करें।

ध्यान की अभ्यास विधि
पद्मासन, सिद्धासन, सुखासन या कुर्सी पर बैठकर रीढ़, गला व सिर को सीधा कर लें। आंखों को ढीली बन्द कर चेहरे को शिथिल कर लें। अब मन में उठने वाले विचारों का द्रष्टा बनने का प्रयास करें। धैर्यपूर्वक मन के विचारों पर ध्यान बनाए रखें। इस विधि का कुछ महीनों तक नियमित अभ्यास करने पर मन शान्त, निर्विचार हो जाता है। प्रतिदिन दस से पन्द्रह मिनट तक इसका अभ्यास करना चाहिए। इससे मन निद्र्वन्द्व तथा चिन्तारहित हो जाता है।

आहार
हल्का आहार लें। इसमें दलिया, चावल, जौ का सत्तू, उबली सब्जियां एवं मौसमी फल पर्याप्त मात्र में शामिल करें। तीखा, मसालेदार खाना, मिठाई, केक, मैदा, शराब, धूम्रपान, कॉफी तथा चाय से सख्त परहेज करें।

इन बातों का भी रखें ध्यान

भोजन खूब चबा-चबाकर खाएं।
अधिक समय तक खाली पेट न रहें। नियमित रूप से समय पर खाएं।
सूर्योदय के पहले बिस्तर छोड़ दें तथा एक-दो गिलास पानी घूंट-घूंट कर पीकर शौच जाने की आदत डालें।

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