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योग ही मेरी पहचान

आज से महज 10 साल पहले भी क्या आप यह सोच सकती थीं कि आपमें जो भी हुनर है, उसे आप अपने प्रोफेशन की शक्ल दे सकती हैं? शायद, नहीं ना!  पर, आज ऐसा नहीं है। कम-से-कम साहिबाबाद, उत्तर प्रदेश के रहने वाली अदिति निगम को देखकर तो ऐसा नहीं लगता। योग के क्षेत्र में अपनी सफलता की कहानी साझा कर रही हैं अदिति निगम

स्कूल में योग सीखना जरूरी था, सो मैं योग के क्लास में जाने लगीं। बड़ा भाई भी योग करता था, तो वहां से भी थोड़ी प्रेरणा मिली। पर, मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा यह छोटा-सा निर्णय कुछ साल बाद मेरी जिंदगी की दिशा बदल देगा। आज योग न सिर्फ मेरा जुनून है, बल्कि यह मेरी पहचान भी है। मैं अब तक राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न योग प्रतियोगिताओं में 35 मेडल जीत चुकी हूं। इसके अलावा 2003 और 2004 में क्रमश: पुर्तगाल और स्पेन में आयोजित प्रतियोगिताओं में ब्रॉन्ज और सिल्वर मेडल भी जीत चुकी हूं। हाल ही में आयोजित अखिल भारतीय योग चैंपियनशिप में मुझे योग साम्राज्ञी के खिताब से नवाजा गया है।

स्कूल स्तर पर ही मैंने विभिन्न मुद्राओं का प्रशिक्षण लिया था। अब मैं अपने स्तर पर ही प्रैक्टिस करती हूं। जब मैं स्कूल में थी, उस वक्त मेरे टीचर ने इस क्षेत्र में मेरे हुनर को पहचाना और मुझे प्रोत्साहित किया। आज जब मैं आईटीएस पैरामेडिकल कॉलेज से फिजियोथेरेपी की पढ़ाई कर रही हूं, तो मेरा कॉलेज मुझे सपोर्ट कर रहा है। मेरी तैयारियों और विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के दौरान आने वाला पूरा खर्च मेरा कॉलेज वहन कर रहा है। दरअसल, मेरे आसपास एक सपोर्ट सिस्टम रहा है, जिसकी वजह से मैं आज अपना एक मुकाम हासिल कर पाई हूं।

योग आज भी भारत में उतना लोकप्रिय नहीं है, जितना हो सकता था। योग की शुरुआत भारत में हुई, पर हमने उसे महत्व नहीं दिया। हमने योग को उस वक्त महत्व देना शुरू किया, जब विदेशों में यह लोकप्रिय होने लगा। आज भी हमारे यहां योग को एक खेल के रूप में मान्यता नहीं मिल पाई है। यहां मैं यह सोच कर निश्चिंत नहीं हो सकती कि चूंकि मुझे योग के क्षेत्र में कई पुरस्कार मिले हैं, तो मेरा भविष्य सुरक्षित है। मुझे अपना करियर किसी और क्षेत्र में बनाना ही होगा। वहीं, विदेशों में ऐसा नहीं है। वहां के खिलाड़ियों पर इतना दबाव नहीं है। विदेशों में सरकार अपने खिलाड़ियों का पूरा ध्यान रखती है।

भारत में खासकर योग के क्षेत्र में एक फेडरेशन नहीं है। यहां चार फेडरेशन हैं और इन चार फेडरेशन के बीच खिलाड़ी फंसकर रह जाते हैं। खिलाड़ियों को न अच्छी ट्रेंनिंग मिल पाती है और न ही अन्य सुविधाएं।  फिर भी खिलाड़ी योग के क्षेत्र में आ रहे हैं, क्योंकि हमें इसका महत्व भी मालूम है और यह भी पता है कि यहां हम अपना करियर भी बना सकते हैं। जैसे, मैं अभी फिजियोथेरेपी की पढ़ाई कर रही हूं और योग व फिजियोथेरेपी को मिलाकर शारीरिक समस्याओं का हल तलाशना चाहती हूं।

ऐसे बनाएं योग में करियर
योग न सिर्फ फिटनेस के लिए जरूरी है, बल्कि इस क्षेत्र में करियर भी विशाल है। अगर आपके पास योग का थोड़ा-सा भी ज्ञान है तो आप यहां करियर बना सकती हैं। आप योग की टीचर बन सकती हैं या फिर अपना ट्रेनिंग इंस्टीटय़ूट भी खोल सकती हैं। योग के लिए सही ट्रेनिंग जरूरी है। आप यहां अगर सच में करियर बनाना चाहती हैं, तो किसी अच्छे संस्थान से ट्रेनिंग जरूर लें। दिल्ली स्थित मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ योग, देश में योग सिखाने वाली सबसे अच्छी संस्था है। आप यहां से कोर्स कर सकती हैं। अगर आप योग की विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना चाहती हैं, तो इसके लिए आपको पहले किसी फेडरेशन का सदस्य बनना होगा।  

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