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डब्ल्यूएसएच से बढ़ रहा लोगों में हॉकी के प्रति रुझान

विश्वकप जीतने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम की लगातार हार के बाद जहां खेल प्रेमियों का इस खेल से मोहभंग हो रहा है वहीं हॉकी के प्रति उनका रुझान बढ़ा है और इसमें विश्व सीरीज हॉकी अहम भूमिका निभा रही है। पूर्व हॉकी खिलाड़ियों का मानना है कि इस नए परिदृश्य में खेल प्रेमियों तथा युवाओं का एक बड़ा वर्ग हॉकी की ओर आकर्षित हुआ है।

हॉकी के गढ़ जालंधर में अब युवाओं के बीच क्रिकेट की बजाए हॉकी की चर्चा आम हो गई है। इनमें कालेज जाने वालों से लेकर सुरजीत हॉकी स्टेडियम में हॉकी तथा बर्लटन पार्क में क्रिकेट का अभ्यास करने वाले युवा भी शामिल हैं। पंजाब हॉकी एसोसिएशन के सचिव तथा पंजाब पुलिस में बतौर पुलिस उप महानिरीक्षक तैनात सुरिंदर सोढ़ी ने कहा कि भारतीय हॉकी महासंघ ने जिस मंशा से इस सीरीज का आगाज किया था उसमें वह सफल हो रहे हैं।

डब्ल्यूएसएच शुरू होने के बाद हॉकी की लोकप्रियता देश में बढ़ी है। युवाओं का रुझान क्रिकेट की बजाए अब हॉकी की तरफ हो रहा है। ओलंपिक में 1980 में स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य रह चुके सोढ़ी ने कहा कि डब्ल्यूएसएच के पहले सत्र में जिस तरह देश भर में हॉकी की लोकप्रियता बढ़ी है वह किसी से छिपी नहीं है। आने वाले तीन चार साल में लोकप्रियता में यह आईपीएल को कड़ी टक्कर देगा।
उन्होंने कहा कि हॉकी इंडिया ने डब्ल्यूएसएच के साथ धोखा किया है इसके बावजूद देश भर में इस खेल की लोकप्रियता बढ़ी है। जहां-जहां भी इन मैचों का आयोजन हो रहा है वहां टिकट लेकर दर्शक स्टेडियम में पहुंच रहे हैं।

सोढ़ी ने दावा किया कि क्रिकेट में लगातार हार और डब्ल्यूएसएच से हॉकी को मिली लोकप्रियता के कारण खेल प्रेमियों का एक बड़ा वर्ग क्रिकेट से हटकर हॉकी की तरफ आकर्षित हुआ है। हॉकी की नर्सरी के नाम से विख्यात संसारपुर में बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे कोच मोहन सिंह ने कहा कि पहले तो हॉकी खेलने वाले बच्चों के मुंह पर क्रिकेट और क्रिकेट खिलाड़ियों के नाम होते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। पिछले कुछ महीनों से इसमें काफी बदलाव आया है और यहां खेलने वाले बच्चों का रुझान हॉकी और हॉकी खिलाड़यों के प्रति बढ़ा है।

सिंह ने कहा कि आईएचएफ का यह कदम मृतप्राय हो चुकी हॉकी के लिए प्राणवायु के समान है। बहुत अच्छा होता कि अगर हॉकी इंडिया और आईएचएफ मिल कर इसका आयोजन करते। इससे हॉकी और हॉकी खिलाड़यों को दोनों को फायदा होता। उन्होंने कहा कि दोनों संगठनों के अलग-अलग काम करने से नुकसान केवल भारतीय हॉकी और इसके खिलाड़ियों का है।

भारतीय टीम के पूर्व कोच तथा द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता राजिंदर सिंह ने कहा कि यह एक अच्छी शुरुआत है। निश्चित तौर पर हॉकी के प्रति लोगों में रुझान बढ़ा है, लेकिन फेडरेशन को इस बारे में और प्रचार करने की आवश्यकता है ताकि लोगों को इस बारे में पता चल सके। कुछ लोग इसलिए भी मैच देखने नहीं पहुंच पाते हैं क्योंकि उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं होती है।

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  • Web Title:डब्ल्यूएसएच से बढ़ रहा लोगों में हॉकी के प्रति रुझान