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बोरिंग व्यायाम क्यों? कुछ नया, मजेदार ट्राई करते हैं

वर्ल्ड हेल्थ डे (7 अप्रैल) पर विशेष
जैसे हम एक ही तरह की रूटीन से बोर हो जाते हैं, ठीक वैसे ही हमारा शरीर एक तरह के एक्सरसाइज रूटीन से बोर हो जाता है। ऐसे में उसे जरूरत होती है बदलाव की। यही वजह है कि फिटनेस ट्रेनर नई-नई ट्रेनिंग तकनीक ईजाद करने पर मजबूर हो रहे हैं। ये न सिर्फ फायदेमंद हैं, बल्कि मनोरंजक भी। शाश्वती का आलेख

आप सोने से पहले चाहे कितनी भी योजनाएं बनाते हों कि कल से नियमित एक्सरसाइज करनी है, पर मन को हर सुबह जिम में वही एक एक्सरसाइज करने के लिए तैयार करना इतना भी आसान नहीं है। ऐसे में आपके जिम इंस्ट्रुक्टर को नियमित अंतराल पर एक्सरसाइज की ऐसी नई तकनीक विकसित करनी पड़ रही है, जो आपको हर दिन एक्सरसाइज करने के लिए प्रेरित कर सके, मांसपेशियों को मजबूत बनाए और साथ ही पर्याप्त मात्र में कैलोरी भी बर्न करे। हम यहां फिटनेस की कुछ ऐसी ही नई तकनीक समेटकर लाए हैं, जो आपकी जिंदगी को सेहतमंद रखने में आपकी मदद कर सकती हैं।

रैंपिंग करो, फिट रहो
रैंपिंग की तुलना रैंप पर कैटवॉक करती मॉडल से कभी नहीं करें। रैंपिंग, रैंप शब्द से बना जरूर है, पर वह इसलिए क्योंकि एक्सरसाइज की इस तकनीक में एक और झुके पतले एक्सरसाइज टूल का इस्तेमाल किया जाता है। इसका आविष्कार अंतरराष्ट्रीय फिटनेस एक्सपर्ट जिन मिल्लर ने किया है। फिटनेस टूल एक ओर झुका रहने से शरीर पर वही प्रभाव पड़ता है, जो इन्क्लाइन ट्रेडमिल वॉकिंग यानी ट्रेडमिल को आगे या पीछे झुकाकर उस पर चलने से होता है। छोटा, हल्का और कहीं भी लेकर जाने योग्य इस फिटनेस टूल पर नियमित एक्सरसाइज पीठ, जांघ और पेट की मांसपेशियों के लिए बेहद उपयोगी है।

दिल्ली में फिटनेस सॉल्यूशन नाम से फिटनेस सेंटर चला रहीं किरण साहनी कहती हैं कि उनके क्लाइंट्स के बीच पिछले कुछ वक्त में रैंपिंग काफी लोकप्रिय हुआ है। यह न सिर्फ बेहद प्रभावशाली है और शरीर को मनचाहा शेप आसानी से मिलता है, बल्कि अतिरिक्त चर्बी भी कम हो जाती है। एक और फायदा यह है कि इसे सीखना आसान है और इसमें मुख्य रूप से आगे चलने और पीछे चलने की हमारी सामान्य शारीरिक गतिविधि को एक एक्सरसाइज की शक्ल दी गई है। हर दिन आधे घंटे की रैंपिंग से आपको जल्द ही मनचाहा परिणाम देखने के लिए मिल जाएगा। पर, इसमें काफी प्रभावशाली मूवमेंट्स पर बल दिया जाता है, इसलिए अगर आप आज पहली दफा यह एक्सरसाइज करने जा रहे हैं तो आपको हमारी सलाह यह होगी कि आप रैंपिंग से शुरुआत न करें।

दिमाग और शरीर के लिए किएंग्बो
इस नाम को आपकी जुबान पर चढ़ने में भले ही थोड़ा ज्यादा वक्त लग जाए, पर दिल्ली और एनसीआर में ब्लैकबेल्ट फिटनेस सेंटर चला रहे और मार्शल आर्ट्स एक्सपर्ट अजय अहलूवालिया और दीपक उप्पल द्वारा विकसित की गई अपेक्षाकृत नई फिटनेस तकनीक किएंग्बो आपके दिमाग और शरीर के लिए है बेहद उपयोगी। दिल्ली और एनसीआर में किएंग्बो के कद्रदानों की संख्या में लगातार बढ़ रही है। किएंग्बो मार्शल आर्ट्स, वेट ट्रेनिंग और पॉलीमेटिक्स के तकनीकों का मिश्रण है। यह न सिर्फ एक्सरसाइज का एक स्वरूप है, बल्कि इसका इस्तेमाल आप अपनी सुरक्षा के लिए भी कर सकते हैं। चूंकि इसमें कई विधाओं की सबसे बेहतर तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए यह न सिर्फ शरीर को बल्कि दिमाग को भी मजबूत बनाता है। किएंग्बो की एक खासियत है कि इसमें एक ओर बेहद शांत और धीमे मूवमेंट्स हैं, जो स्थिरता को बढ़ावा देते हैं, तो दूसरी ओर बेहद तेज मूवमेंट्स भी हैं, जो शरीर को मजबूत बनाते हैं। किएंग्बो में पूरे शरीर के व्यायाम पर बल दिया जाता है। इसका उद्देश्य शरीर में लचक को बढ़ाना और उसे मजबूत बनाना है।

शुरुआत में हर दिन एक घंटा देने से आप आसानी से इसकी बारीकियों को सीख पाएंगे। एक बार किएंग्बो एक्सपर्ट बन जाने के बाद हर दिन 35 से 40 मिनट तक यह वर्कआउट करना पर्याप्त है।

संतुलन और सिक्स पैक एब्स के लिए फ्लोइन
फ्लोइन दरअसल एक्सरसाइज करने वाला एक मैट या दरी होती है। एक्सरसाइज के विभिन्न मूवमेंट्स करने के दौरान आपको इस मैट पर फिसलना होता है और तय है कि इस दौरान पूरा ध्यान आपको अपने ग्रिप पर देना होता है। मात्र 25 मिनट एक्सरसाइज करने से भी पूरे शरीर का पर्याप्त व्यायाम हो जाता है। शरीर को भीतर से मजबूत बनाने, संतुलन को बढ़ावा देने और मांसपेशियों के छोटे-छोटे समूह को मजबूत बनाने के लिए फ्लोइन उपयोगी एक्सरसाइज है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी मदद से आप असानी से सिक्स पैक एब्स बना सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि फ्लोइन के विभिन्न एक्सरसाइज को करने के दौरान संतुलन पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है और इस कारण, सिक्स पैक एब्स आसानी से और जल्दी बन जाते हैं। आप चाहे सालों से एक्सरसाइज कर रहे हैं या फिर आज से ही अपनी फिटनेस को लेकर जागरूक हुए हैं, दोनों ही स्थिति में फ्लोइन उपयोगी साबित हो सकता है। एक बार फ्लोइन एक्सरसाइज सीखने के बाद आप इसे घर पर भी कर सकते हैं।

इन वेबसाइट्स पर संपर्क कर सकते हैं
www.blackbeltfitness.in
www.fitnesolution.com

नया ट्राय करें, पर इन बातों का ध्यान रखें
1. कोई भी नया एक्सरसाइज रूटीन फिटनेस ट्रेनर की देखरेख में ही शुरू करें और उस पर पूरा विश्वास करें।
2. इस बात का ध्यान रखें कि आपका ट्रेनर आपके ऊपर किसी तरह का एक्सपेरिमेंट न करे।
3. इंटरनेट या यू-टय़ूब पर वीडियो क्लिप देखकर कोई एक्सरसाइज शुरू न करें। ऐसा करने पर चोट लगने की आशंका काफी ज्यादा रहती है।

एक से भले दो
एक्सरसाइज के दौरान होने वाली बोरियत को दूर भगाना है तो साथ एक्सरसाइज करने के लिए एक पार्टनर ढूंढ़ लीजिए! अगर हमारी बातों पर आपको विश्वास नहीं होता तो टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा की बातों पर विश्वास कीजिए! शादी के बाद सानिया ने अपने रीयल लाइफ पार्टनर शोएब मलिक के साथ एक्सरसाइज करना शुरू किया और उस वक्त से वो पार्टनर के साथ एक्सरसाइज करने की इस तकनीक की मुरीद हो गई हैं। कई फिटनेस गुरु मानते हैं कि यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा फिटनेस ट्रेंड है। फिटनेस एक्सपर्ट का मानना है कि जब दो लोग साथ एक्सरसाइज करते हैं तो आसपास सकारात्मक ऊर्जा में कई गुना इजाफा हो जाता है और आसपास का यही माहौल हमें बेहतर तरीके से व्यायाम करने के लिए प्रेरित करता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आप अपने पालतू जानवरों को भी अपना एक्सरसाइज पाटर्नर बना सकते हैं।

भीतर से मजबूती के लिए योगीलेट्स
योगासन और पाइलेट्स (एक प्रकार का एक्सरसाइज) आपस में मिलकर बन गए हैं योगीलेट्स। सालों से तन और मन की शांति के लिए योगासन किया जा रहा है। वहीं, पाइलेट्स है तो अपेक्षाकृत नई तकनीक, पर इसका सिद्धांत भी योगासन से मिलता-जुलता ही है। अब फिटनेस एक्सपर्ट योगासन और पाइलेट्स का समिश्रण लेकर आए हैं, योगीलेट्स के रूप में। पाइलेट्स में शरीर के केंद्र को मजबूत बनाने के लिए हर एक्रसाइज को किया जाता है, वहीं  इस दौरान जोड़ों को मजबूत बनाने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाता है। फिटनेस एक्सपर्ट किरण साहनी का कहना है कि योगीलेट्स, फिटनेस को लेकर जागरूक लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। ‘एक्सरसाइज की इस तकनीक को तैयार करने में योगासन और पाइलेट्स दोनों के फायदे का इस्तेमाल किया गया है। यही वजह है कि मात्र 30 मिनट भी योगीलेट्स करने से आपको उसके फायदे कई गुना ज्यादा होते हैं।’

योगीलेट्स में मुख्य रूप से पीठ और पेट के एक्सरसाइज पर बल दिया जाता है और इसका परिणाम यह होता है कि पोश्चर ठीक हो जाता है, सांस लेने की तकनीक ठीक हो जाती है, ध्यान बेहतर तरीके से केंद्रित होता है और इसके परिणामस्वरूप पूरे शरीर को मजबूती मिलती है।

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