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साहित्य सृजन कर रहा है सिनेमा: विनय पाठक

वीडियो जॉकी से अभिनेता बने विनय पाठक मानते हैं कि वर्तमान समय में भारतीय सिनेमा आधुनिक समाज में साहित्य के रिक्त पड़े स्थान को भर रहा है।

विनय ने कहा कि मुझे लगता है कि हम हमेशा से ज्यादा फिल्में बना रहे हैं। मुझे महसूस होता है कि आज हमारे फिल्मोद्योग में अलग-अलग तरह के कहानी कहने वाले, अलग-अलग तरह के फिल्मकार हैं। यह नई कहानियां लेकर आने वालों के लिए अच्छा समय है और वे अलग-अलग ढंग से अपनी कहानी कह सकते हैं।

करीब डेढ़ दशक के अपने करियर में विनय ने 'खोसला का घोसला', 'भेजा फ्राई' और 'दस्विदानिया' जैसी अलग तरह की फिल्मों में बेहतरीन अभिनय कर खुद की अभिनय क्षमता को साबित किया है। फिल्मों की दुनिया में कदम रखने से पहले विनय रणवीर शौरी के साथ चैनल वी के लोकप्रिय शो 'ओय' का प्रस्तुतिकरण करते थे।

उन्होंने कहा कि हम एक अद्भुत राष्ट्र हैं लेकिन आधुनिक साहित्य के नाम पर हमारे पास कुछ नहीं है। कोई भी समसामयिक साहित्य नहीं लिख रहा है। अंतिम साहित्यकारों में मुझे कमलेश्वर, राजेंद्र अवस्थी या मनोहर श्याम जोशी याद हैं। विनय ने कहा कि ऐसा नहीं है कि हमारे पास साहित्यकार नहीं हैं लेकिन हर पीढ़ी के अपने साहित्यकार होते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए हमारे सिनेमा के पास देश की आज की स्थिति को ध्यान में रखते हुए कुछ साहित्य है। मुझे लगता है कि 70 के दशक में फ्रांसीसी सिनेमा में जो हुआ था वह आज के भारतीय सिनेमा में हो रहा है।

विनय की अगली फिल्म 'पप्पू कांट डांस साला' है, जो 16 दिसम्बर को प्रदर्शित होगी। विनय के अलावा नेहा धूपिया ने भी इसमें अभिनय किया है। सौरभ शुक्ला इसके निर्देशक हैं। वह इस दौर को हिंदी सिनेमा का काया-पलट का समय मानते हैं और खुद इस वक्त की फिल्मों का हिस्सा बनकर खुश हैं। उन्होंने कहा कि यह काया-पलट का समय है और मैं भाग्यशाली हूं कि मैं इस दौर की फिल्मों का हिस्सा बना। मैं 'खोसला का घोसला', 'मिथ्या', 'भेजा फ्राई', 'दस्विदानिया', 'ए वेडनस्डे' और 'देव डी' जैसी फिल्मों के जरिए इस नए सिनेमा का हिस्सा बनता रहा हूं।

 

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