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उपेक्षा से आहत है बैड़मिंटन का वेटरन नेशनल चैंपियन

वेटरन बैड़मिंटन खिलाड़ियों को संघ और सरकार की ओर से आर्थिक सहायता और खर्च दिये जाने की मांग करते हुए पंजाब को इस साल लगातार दूसरी बार नेशनल वेटरन चैंपियन का खिताब दिलाने वाले राम लखन ने कहा है कि बैड़मिंटन खिलाड़ियों को दी जाने वाली सुविधा वेटरन खिलाड़ियों को भी मिलनी चाहिए।
   
भारतीय बैड़मिंटन संघ द्वारा इस साल उत्तराखंड के हरिद्वार में 24 से 28 मार्च तक आयोजित सीनियर वेटरन बैड़मिंटन चैंपियनशिप में 45 साल से अधिक उम्र वर्ग का एकल खिताब अपने नाम करने वाले पंजाब के राम लखन ने कहा कि सरकार की ओर से इन टूर्नामेंटों में खेलने के लिए हमें कोई मदद नहीं मिलती है। मैंने अपने खर्चे पर टूर्नामेंट में खेलकर पंजाब को यह खिताब दिलवाया है।

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर मुझे इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए कोई मदद नहीं मिली। वेटरन खिलाड़ियों को भी मौजूदा राष्ट्रीय खिलाड़ियों की तरह आर्थिक मदद मिलनी चाहिए। पंजाब सरकार के बिजली विभाग में जालंधर में काम करने वाले और तीसरी बार इस खिताब को अपने नाम करने वाले राम लखन ने कहा, मेरा मानना है कि बैड़मिंटन को बढ़ावा देने के लिए संघ अथवा सरकार को वेटरन खिलाड़ियों की मदद करनी चाहिए। हम अभ्यास करने के लिए भी शटल कॉक खुद ही खरीदते हैं। टूर्नामेंट में खेलने के लिए खर्चा भी खुद करते हैं और चैंपियनशिप राज्य अथवा देश के लिए जीतते हैं।

राम लखन इससे पहले 2009 तथा 2011 में वेटरन नेशनल चैंपियनशिप में एकल वर्ग का खिताब पंजाब को दिला चुके हैं। इतना ही नहीं उन्होंने मलेशिया में 2004 में विश्व वेटरन चैंपियनशिप भी जीती थी।
   
उन्होंने कहा कि जहां कहीं भी हम खेलने जाते हैं, अपने खर्चे पर जाते हैं। सरकार या संघ की ओर से कोई आर्थिक मदद नहीं मिलती। मुझे इस खेल का जुनून है। इसलिए मैं इसे छोडे़ भी नहीं सकता। मलेशिया भी मैं अपने ही खर्चे पर गया था। पिछले साल कनाडा भी गया था। हालांकि वहां मैं हार गया था।
   
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले का रहना रहने वाला यह खिलाड़ी लंबे समय से पंजाब में रह रहा है और यहीं नौकरी करता है।

राम लखन ने कहा कि जब हम जीत जाते हैं तो कहा जाता है कि चैम्पियन पंजाब या भारत हुआ है लेकिन इसके लिए कोई शाबासी तक नहीं देता है जबकि क्रिकेटर जीत कर आते हैं तो उनके स्वागत के लिए पूरा अमला जुट जाता है लेकिन हम जब जीत कर आते हैं तो कोई जानता भी नहीं है।

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