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चारों कोण 90 डिग्री पर हों, तो प्लॉट शुभ

एक महल हो सपनों का। यह सपना तो सबका होता है। अगर आप भी अपने सपनों का घर बनाने जा रहे हैं, तो थोड़ी सावधानी बरत लें। वास्तु को ध्यान में रखकर बनाया घर आपकी सेहत को दुरुस्त रखेगा और समृद्धि भी देगा।

घर बनाने में वक्त और पैसा दोनों खर्च होता है। एक बार घर बन गया तो उसमें कोई बदलाव करना खासा मुश्किल काम होता है। इसीलिए जरूरी है कि घर बनाने से पहले वास्तु से जुड़ी सारी बातें जान ली जाएं और उन पर अमल करके ही घर बनवाया जाए। घर की सेहत सही रहेगी तो आपकी सेहत भी सही रहेगी और तन और मन खिला-खिला रहेगा।

सबसे पहले देखें
जहां घर बना रहे हैं, उस प्लॉट का मुंह किस दिशा में है, इसे दिशा-सूचक (कंपास) की सहायता से जान सकते हैं। जमीन के किनारे भी इस बात को तय करते हैं कि वह जमीन आपके लिए कितनी फायदेमंद है। अगर प्लॉट के चारों कोण 90 डिग्री के हैं तो वह प्लॉट फायदेमंद है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि प्लॉट का दक्षिण-पश्चिम कोण 90 डिग्री का हो। यह किसी भी सूरत में 90 डिग्री से अधिक नहीं होना चाहिए। इसकी पूरी जानकारी वास्तु विशेषज्ञ से जरूर लें, ताकि यह दोषपूर्ण न रहे।

जमीन का साफ होना है आवश्यक
ध्यान रखें कि प्लॉट पर निर्माण कार्य कराने से पूर्व उसे अच्छी तरह साफ करवा लेना चाहिए। प्लॉट पर किसी तरह की झाड़ियां, कंकर-पत्थर, जला हुआ कपड़ा, हड्डी का टुकड़ा आदि न रहे।

वास्तु पूजा
प्लॉट की साफ-सफाई के बाद निर्माण कार्य से पहले भूमि पूजन किया जाता है। भूमि-पूजन में वास्तु शांति और वास्तु यंत्र स्थापना जरूर शामिल होने चाहिए। ज्योतिषी से शुभ दिन और शुभ समय निकलवाकर ही भूमि-पूजा की जानी चाहिए। पूजा प्लॉट के किसी भी हिस्से में नहीं की जा सकती। वास्तु दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्लॉट के किसी खास हिस्से में ही पूजा विधिपूर्वक संपन्न करें।

जमीन का स्तर निर्धारित करें
इस विधान में जमीन का स्लोप यानी स्तर निर्धारित किया जाता है। वास्तु दिशा-निर्देशों के अनुसार भूखंड के स्तर को इस प्रकार निर्धारित किया जाना चाहिए कि वह सड़क के स्तर से ऊंचा हो। जमीन के दक्षिण-पश्चिमी भाग को भी उत्तर-पूर्वी भाग की अपेक्षा ऊंचा रखना चाहिए।

मिट्टी से जानें शुभ-अशुभ
प्लॉट के मध्य में सवा दो फुट गहरे, सवा दो फुट लंबे और सवा दो फुट चौड़े दो गड्ढे बनाएं। इनमें से एक गड्ढे को खोदी गई मिट्टी से भरें। यदि गड्ढा भरने के पश्चात मिट्टी बच जाती है, तो वह प्लॉट अनुकूल है। खोदी गई मिट्टी से गड्ढा पर्याप्त रूप से भर जाता है, तो वह भूमि औसत है। किंतु अगर खोदी गई मिट्टी से गड्ढा पूरी तरह नहीं भर पाता है, तो ऐसी भूमि अनुकूल नहीं मानी जाती। इसी प्रकार दूसरे गड्ढे को ऊपर तक पानी से भर दें। जमीन को पानी सोखने में यदि एक घंटे से अधिक समय लगता है, तो वह भूमि अनुकूल है। पानी सोखने के बाद गड्ढे में कटाव दिखाई देते हैं, तो ऐसी भूमि शुभ नहीं होती।

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