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जनता मांग रही विकास, नेता बता रहे जात

जेपी नगर लाइव 
जेपी नगर। यह जिला शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं से यहां के लोगों की जद्दोजहद कायम है। यहां के लोग विकास की मांग करते रहे लेकिन नेता लोगों को जाति के खांचे में बांटकर अपनी राजनीति चमकाते रहे। सिर्फ अमरोहा ही नहीं बल्कि जिले की चारों सीटें इस अभिशाप की छाया से अछूती नहीं रहीं। विधानसभा सीट अमरोहा बीड़ी और ढोलक, काटन वेस्ट के कारोबार के लिए जानी जाती है। लेकिन इनकी प्रगति के लिए किसी ने कुछ नहीं किया। आलम यह है कि यहां सब कुछ धर्म और जाति के इर्द गिर्द बंट सा गया है।

कोट चौराहा: सुबह 10.00 बजे
एक दुकान पर पहुंचा। यहां पर चर्चा चुनावी थी। वोट और प्रत्याशी को लेकर चल रही गरमागरम बहस का केंद्र बिंदु विकास था। दुकानदार जुल्फी और अतुल दो उम्मीदवारों के अब तक वायदे और उनमें से कितने पूरे हुए की लंबी फेहरिस्त लिए बैठे थे। दोनों ने इस बात को स्वीकार भी किया। जातीय आंकड़ों में फंसे ये दो युवा अकेले नहीं। इसी मुहल्ले की शमीमा खातून, डिग्री कॉलेज की छात्र कविता, ज्योति, परवीन, शहजादी, अकमल, फैय्याज के नाम भी इसी में शुमार हैं। इन्हें विकास चाहिए लेकिन नेता इन्हें जाति में उलझाते रहे। इस बात का गुस्सा इस शहर के वोटरों में साफ दिखा। मुहल्ला नल के रहने वाले वसीम, आशफाक, रोहित, अजय यादव कहते हैं कि वोट की खातिर नेताओं ने जात-पात की लकीर खींच दी।

मुरादाबादी गेट के पास चाय की दुकान पर पहुंचे तो यहां मुहल्ला नल के आरिफ, गुजरी के यूनुस, सुबोध कॉलोनी लाइनपार के अजय कुमार से मुलाकात हुई। आरिफ और यूनुस तो बिरादरी के बंधन में दिखे लेकिन अजय ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या जलभराव है। दूसरी गंदगी। लेकिन लोग इन मुद्दों को दरकिनार करने से नहीं चूक रहे। आधा शहर जलभराव से जूझ रहा है।

नौगावां सादात: दोपहर 12.30 बजे
परिसीमन के बाद नई बनी विधानसभा है। वैसे तो इस विधानसभा का क्षेत्र दो जिलों की चार तहसीलों व आठ थाना क्षेत्रों में फैला है। बीड़ी और हैंडलूम का प्रमुख कारोबार होने के नाते यहां की दशा नाजुक है। नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बावजूद शहर की हालत तो बदतर है ही लोग भी कम परेशान नहीं। अमरोहा से निकलते ही नौगावां कस्बा से पहले ही गांव है बादशाहपुर। यहां इंटर कॉलेज के नजदीक ही कुछ लोग चुनाव पर ही चर्चा कर रहे थे। मूंढ़ाखेड़ा के जगसरन ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या बिजली की है। कमल कुमार, पृथ्वीपुर के अमन, राजेश, नौगावां के सिराज,अनवर, आलिम, एजाज, अकमल कहते हैं कि दूध का धुला कोई नहीं है। जब सभी अपने वर्ग को पकड़ रहे हैं तो हम ही पीछे क्यों रहें। फिर बुनकर और बीड़ी कारोबार के उत्थान के नारे लग रहे हैं। नौगावां सादात के मुख्य बाजार में कारोबारी इलियास बताते हैं कि बीड़ी का सबसे बड़ा कारोबार है। बुनकरों की तादाद भी कम नहीं, लेकिन कर्ज और सहूलियतों के अभाव में दशा बदतर होती जा रही है। वोटों की स्थिति पर कहते हैं कि यहां पहले बिरादरी है फिर पार्टी। मूंढ़ाखेड़ा के अनवर, रामसहाय कहते हैं कि अभी तय नहीं किया है किसे वोट दें। पहली बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व होने जा रहा है। अपने बीच का कोई पहुंचे तो विकास की उम्मीद कर सकते हैं।

हसनपुर: दोपहर 2.30 बजे 
हसनपुर विधानसभा का सियासी रसूख है लेकिन लोगों की समस्याएं यहां भी कम नहीं हैं। सड़कें, बिजली, शिक्षा और चिकित्सा सरीखी मूल सुविधाओं के लिए आज भी यहां जद्दोजहद जारी है। अमरोहा से तकरीबन 23 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद पहुंचते हैं हसनपुर। दिल्ली से आने वालों के लिए गजरौला से महज दस किलोमीटर की दूरी है। यहां के लोगों का बाढ़, गंदगी, सड़कें और बिजली से बुरा हाल है। चुनाव पर सद्दीक अहमद कह रहे थे कि यहां की लड़ाई तो साफ है। मुकाबला सीधा है। दो उम्मीदवारों के बीच हार जीत की रस्साकशी है। चंदनपुर मिल के गेट पर फूलपुर गांव निवासी चमन सिंह कहते हैं कि गन्ना बेल्ट में किसानों को कोई सहूलियत नहीं मिल रही। कभी पर्ची नहीं आती तो कई-कई दिन तक गन्ने की तौल को लाइनों में लगना मजबूरी बन गया है। वक्त पर खाद मिलता है न बीज। जो भी एमएलए बने वह किसानों की परेशानी समझने वाला हो। ढवारसी गांव की दशा भी छिपी नहीं है। इस गांव की साप्ताहिक बाजार में परचून की दुकान लगाकर बैठे नाजिम अली कहते हैं कि कानून-व्यवस्था भी बड़ा मुद्दा है। असुरक्षा के कारण कारोबार चौपट हो गया है। सैदनगली गांव प्राइमरी स्कूल के अध्यापक नईमुल से मुलाकात हुई तो उनका नजरिया सबसे जुदा रहा। कहते हैं कि चुनाव में जाति का फैक्टर है इसे नकारा नहीं जा सकता लेकिन लोगों की सोच बदली है। अब सभी विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं।

मंडी धनौरा: शाम  4.30 बजे
मुरादाबाद-बिजनौर और गाजियाबाद जनपदों के बीच बसे धनौरा को परिसीमन के बाद पहली मर्तबा विधानसभा क्षेत्र का दर्जा मिला। वोटर तय ही नहीं कर पा रहे हैं कि किसे विधानसभा पहुंचाएं। ओमकार गर्ग ने बताया कि नगरपालिका का दर्जा मिलने के बावजूद लोगों की समस्याएं कायम हैं। ऐसे में लोग विकास कराने वाले को ही चुनेंगे। इसी विधानसभा क्षेत्र में है दूसरी नगरपालिका बछरायूं। सियासतदारों का गढ़ माने वाली इस नगरी के लोगों का दर्द भी बिजली, सड़क और पेयजल के साथ-साथ जलभराव ही है। मारूफ कमाल कहते हैं कि अबकी उसे चुनेंगे जो हमारे बीच का हो हमारी सुने। सुलतानपुर में चौपाल पर बैठे 90 वर्षीय बुद्धन कहते हैं कि गांव की समस्याएं जस की तस हैं। पहले सब चक्कर मारते हैं और जाति- धर्म के छलावे में आकर लोग वोट भी देते हैं लेकिन बाद में न जाति याद रहती है और धर्म के लोगों की समस्याएं। शेरपुर, शहबाजपुर और कल्याणपुर माफी भी इस विधानसभा क्षेत्र के गांव हैं। यहां भी वही समस्याएं।

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