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विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष को रोक सकती हैं मेयर

उत्तर प्रदेश में बरेली जिले के बरेली कैंट क्षेत्र में राज्य विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष राजेश अग्रवाल के लगातार पांचवी बार विधानसभा में प्रवेश रोकने के लिए पूर्व पत्रकार एवं बरेली की मेयर सुप्रिया ऐरन मैदान में हैं।

सपा उम्मीदवार फहीम के पिता अशफाक अहमद बरेली कैंट से चार बार, भाई इस्लाम साबिर और भतीजा इस्लाम एक-एक बार विधायक रह चुके हैं जबकि सुप्रिया ऐरन के सांसद पति प्रवीण सिंह ऐरन ने भी दो बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है।

वर्ष 2007 में इस सीट से राज्य में सत्तारुढ़ बहुजन समाज पार्टी के खाते में गई इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए बसपा ने एक ब्राह्मण प्रत्याशी रामगोपाल मिश्रा पर दांव लगाया है। पिछले चुनाव में इस सीट से बसपा के टिकट पर निर्वाचित वीरेन्द्र सिंह नए परिसीमन के बाद बरेली कैंट क्षेत्र के बजाय बिथरीचैनपुर क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं।

बरेली कैंट क्षेत्र से बरेली बार एसोसिएशनके पूर्व सचिव चंद्रशेखर जदयू, राकेश कश्यप (जनक्रांति पार्टी) और इत्तेहाद.ए. मिल्लत काउंसिल के अनीस अहमद खान और अमर सिंह की अगुवाई वाले लोकमंच के नवीन शर्मा तिवारी समेत कुल 27 उम्मीदवार मैदान में हैं।

इस सीट पर राज्य विधानसभा चुनाव के सातवें चरण में तीन मार्च को होने वाले चुनाव के लिए कुल दो लाख 48हजार मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें एक लाख 60 हजार महिलाएं हैं।

राज्य विधानसभा के वर्ष 1951 से अब तक हुए 15 चुनावों में यह सीट आठ बार कांग्रेस, जनसंघ एवं सपा दो-दो बार तथा एक-एक बार जनता दल, बसपा और निर्दलीय की झोली में गई है।

वर्ष 951 में बरेली पूर्व के नाम वाली इस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार बेगम साफिया अब्दुल वाजिद चुनाव जीती थी। इसके बाद बरेली कैंट के नाम से अस्तित्व में आई इस सीट से वर्ष 1957 और वर्ष 1962 में कांग्रेस के मो.हुसैन निर्वाचित हुए।

वर्ष 1967 में कांग्रेस प्रत्याशी मो.हुसैन भारतीय जनसंघ के टिकट से चुनाव मैदान में उतरे आर वल्लभ से 1900 से ज्यादा मतों से हार गए थे लेकिन वर्ष 1969 में हुए मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर फिर से कब्जा कर कर लिया। इस चुनाव में कांग्रेस के अशफाक अहमद निर्वाचित हुए।

इसके बाद वर्ष 1974 में अशफाक अहमद, करीब 4500 मतों से हराकर जनसंघ के उम्मीदवार बादाम सिंह राज्य विधानसभा के सदस्य बने। उन्होंने जनता लहर के बावजूद वर्ष 1977 और फिर वर्ष 1980 में भी इस क्षेत्र से कांग्रेस का परचम लहराया।

वर्ष 1985 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में मैदान में उतरे अशफाक अहमद कांग्रेस के रफीक अहमद रफ्फन से 15 हजार से ज्यादा वोट से चुनाव हार गए थे।

इसके बाद वर्ष 1989 में हुए राज्य विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस ने अशफाक अहमद के पुत्र इस्लाम साबिर को मैदान में इस क्षेत्र से मैदान में उतारा लेकिन वह जनता दल के उम्मीदवार प्रवीण सिंह ऐरन से पराजित हो गए।

इस्लाम साबिर वर्ष 1991 में हुए विधानसभा के मध्यावधि चुनाव में भाजपा के राधेश्याम को 288 से अधिक मत से हराकर इस सीट से निर्वाचित हुए। वर्ष 1993 में सपा उम्मीदवार प्रवीण सिंह ऐरन भाजपा के राधेश्याम को 1600 हजार से ज्यादा वोट से हराकर दोबारा क्षेत्र के विधायक बने और बाद में मायावती सरकार में मंत्री बनाए गए। इसके बाद वर्ष 1996 में सपा ने अशफाक अहमद को मैदान में उतारा जिन्होंने भाजपा के राधेश्याम को साढे 12 हजार से ज्यादा वोट से हराकर चौथी बार विधानसभा में प्रवेश किया।

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  • Web Title:विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष को रोक सकती हैं मेयर