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दमदार नुमाइंदे की तलाश

शाहजहांपुर लाइव
मीरानपुर कटरा: रात 10.30 बजे

शाहजहांपुर से बरेली की ओर शुरू हुआ सफर.. उखड़ी रोड पर हिचकोले खाते हुए मीरानपुर कटरा पहुंचे। ओवरलोड ट्रकों के पास से गुजरते वक्त दिल तेजी से धड़क रहा था कि ट्रक कब पलट जाए पता नहीं। हमने हाइवे छोड़ा और कटरा से खुदागंज के लिए निकले। रास्ते में पुलिस का बैरियर खुला मिला, दो पुलिस वाले मिले, बताने लगे कि कुछ देर पहले ही बैरियर खुला है। एक गाड़ी आई.. रोकी नहीं, रफ्तार इतनी कि अगर हम लोग पीछे नहीं हटते तो शायद चपेट में आ जाते।

खुदागंज: रात 11 बजे
कटरा से खुदागंज के लिए निकले। गाड़ी तो बीस से तीस किलोमीटर की रफ्तार से आगे बढ़ ही नहीं पा रही थी। यह एक ऐसी सड़क थी जो वाकई खुदा के भरोसे ही थी। ठाकुरों का गढ़ कहा जाने वाला यह इलाका पहले तिलहर विधानसभा क्षेत्र में था। नए परिसीमन में कुछ इलाका- बढ़ा और घटा तो यह कटरा विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा हो गया। बीते चुनावों में यहां जातीय समीकरण ने बहुत हद तक सियासी तस्वीर तय की है। बाबू सत्यपाल सिंह यादव कई बार यहां से विधायक चुने गए, वह सांसद रहे और केंद्र की भाजपा सरकार में मंत्री भी। सुरेंद्र विक्रम सिंह विधायक बने, मुलायम सिंह यादव भी यहां से चुनाव लड़े और कांग्रेस के वीरेंद्र प्रताप सिंह मुन्ना यहां से कई बार विधानसभा के लिए चुने गए। इतने प्रभावशाली लोगों का नेतृत्व मिलने के बाद भी इलाका जस का तस ही रहा। इस बार भी जातीय समीकरण अहम हैं और आम आदमी के मुद्दे गायब।

दूसरा दिन, निगोही: सुबह दस बजे
खुदागंज से ही रास्ता आता है तिलहर विधानसभा के निगोही के लिए। यहां भी प्रत्याशी जातीय गणित बिठाने में लगे हैं। पब्लिक उसे ही वोट देना चाहती है, जो सबसे ज्यादा जबर दिखे। ऐसा क्यों है.. जवाब मिला हमें रामसनेही से। बोले, हम लोग तो तंग आ गए हैं, पुराने फामरूले पर वोट देते-देते। जनता परेशान होती है, लेकिन इस बार भी हमारे चाहने से कुछ नहीं होने वाला है।

शाहजहांपुर: दोपहर 12 बजे
शाहजहांपुर में लोगों से सिटी अस्पताल, रिंग रोड, सीवर लाइन की बातें जरूर सुनने को मिलीं, लेकिन अंदरखाने चुनाव का रंग भगवा और दूसरे रंगों के बीच ही दिखा। यहां छह बार से लगातार चुनाव जीत रहे सुरेश कुमार खन्ना का सातवीं बार मुकाबला कांग्रेस के फैजान अली, सपा के तनवीर खां और बसपा के असलम खां से है। शाहजहांपुर से निकले हम पुवायां की ओर। पुवायां सुरक्षित सीट है। यहां  मतदाता खामोश हैं लेकिन जनता के मुद्दों की परवाह सबको है।

पुवायां: तीन बजे
पुवायां के राजीव चौक जेपी पांडेय मिले। नौकरीपेशा हैं लेकिन राजनीति पर बोलने से कतराते रहे। बोले, छले जा रहे हैं अब तक यहां के लोग। विकास की बात कोई नहीं करता है। खुटार जैसी जगह में लड़कियों के लिए इंटर कॉलेज तक नहीं है, सीएचसी का मसला अब भी लटका हुआ है। बंडा को नगर पंचायत का दर्जा नहीं मिल पाया। पुवायां में चीनी मिल बंद हो गई। सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया, उनका बकाया नहीं मिला, पुवायां से बंडा रोड का बुरा हाल है।

कांट: शाम छह बजे
पुवायां से हम पहुंचे ददरौल। यह सीट पूरे प्रदेश बेहद चर्चा का विषय बनी थी प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री अवधेश कुमार वर्मा के कारण। मायावती ने उन्हें बर्खास्त ही नहीं किया, बल्कि पार्टी का टिकट भी नहीं दिया। अवधेश ने भाजपा का झंडा थाम लिया। बसपा ने रावतपुर के रिजवान अली को टिकट दिया है तो सपा ने अवधेश की बिरादरी के ही राममूर्ति को सामने खड़ा कर दिया। महान दल ने इस सीट पर देवेंद्रपाल सिंह को उतार दिया। बयार यहां भी ठाकुरों, लोधों, काछी वोटों पर बह रही है। कुर्रियाकला के राम सिंह बताते हैं कि हम लोगों को तो वोट देना है, अभी तो देख रहे हैं कि कौन मजबूत है।

जलालाबाद: 8 बजे
जलालाबाद में लड़ाई अगड़ों और पिछड़ों के बीच सिमटती जा रही है। यहां समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। बाढ़ सबसे बड़ी समस्या और मुद्दा बनकर उभरी है, लेकिन अगड़ों और पिछड़ों की लड़ाई के बीच यह मुद्दा दबा हुआ सा लगता है।

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