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बिजनौर ने सपने देखना बंद कर दिया है

2007 में बिजनौर अपनेआप पर इतराया। बहुजन समाज पार्टी को सात की सात सीटें तोहफे में देने के बाद यह बसपा के लिए वीआईपी बन बैठा। सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल, गंगा एक्सप्रेस वे से लिंक वे.. सरीखी घोषणाओं के बाद शहर को अपनी सूरत बदलती दिखाई देने लगी। उसने सपने देखने शुरू कर दिए। लेकिन बिजनौर आज भी वैसा ही है जैसा पहले था। हां, लोगों ने अब सपने देखना जरूर छोड़ दिया है। मायावती की लोकसभा सीट रही बिजनौर की सियासत भी पड़ोसियों को देख बदल रही है। यहां पारंपरिक सियासी दलों के साथ ही महान दल की भी चर्चाएं हैं। और दावा कि सैनी वोटरों की पसंद बन सकता है यह दल। 

बिजनौर: सुबह 9 बजे
चर्चा में हैं शाहनवाज राणा। बसपा विधायक रहे शाहनवाज अब रालोद के साथ हैं। पांच साल पहले बसपा के साथ खड़े दबंग छवि के इस नेता ने सीट निकाली थी। बसपा से छुट्टी हुई तो रालोद ने लपक लिया। प्रोविजन स्टोर चला रहे सुरेश सैनी कहते हैं,‘मुकाबला तो राणा और भाजपा के पूर्व राज्यमंत्री भारतेन्द्र के बीच ही है।’ दबंगई के चर्चे के साथ सहनपुर एस्टेट के भारतेन्द्र के रजवाड़े की बातें भी हैं। उनके पड़ोसी कमल सिंह कहते हैं-बसपा का तो इस बार प्रचार ही नहीं। लगता है कि सीट जीतने से ज्यादा राणा को हराने के लिए चुनाव लड़ा जा रहा है। सपा से रुचिवीरा और बसपा ने महबूब अहमद को टिकट दिया है।

सिसौना गांव के आसपास, दोपहर 11.30 बजे
चांदपुर सीट का हिस्सा है ये गांव। गांव तक गाड़ी पहुंचना मुश्किल। इस गांव के अशोक त्यागी पत्नी को इलाज के लिए मेरठ ले जा रहे हैं। कारण-बिजनौर में ढंग की मेडिकल सेवाएं नहीं। अशोक कहते हैं,‘कोई नई सुविधा तो दूर की बात गन्ने का भुगतान भी समय से नहीं हो रहा। हमारा बिजनौर गन्ना उत्पादन में नंबर दो है लेकिन एक शोध संस्थान तक नहीं मिला बिजनौर को।’ बसपा विधायक इकबाल ठेकेदार को दोबारा यहां से टिकट मिला है। लोगों का मानना है कि प्रत्याशी बदलने से बसपा को फायदा होता। उनसे मुकाबिल हैं सपा प्रत्याशी शेरबाज पठान। पठान जेल में हैं। पठान की बीवी व भाई सहानुभूति के बल पर वोट बटोरने के लिए जनसंपर्क कर रहे हैं। भाजपा की कविता चौधरी व रालोद के दो बार के पूर्व विधायक स्वामी ओमवेश भी अपना दावा मजबूत करने में लगे हैं। महान दल के अरविंद कुमार उर्फ पप्पू की बातें भी कम नहीं हैं।

नूरपुर दोपहर 1.30 बजे
सीट नई तो बसपा ने प्रत्याशी भी नया उतार दिया। हाजी उस्मान अंसारी को यहां से टिकट दिया गया। सेवहरा से विधायक यशपाल सिंह हाथी से उतारे जाने के बाद हैण्डपम्प का हैण्डल पकड़ चुके हैं। रालोद ने उन्हें टिकट दिया है। वहीं सपा के सेवहरा सीट के पुराने खिलाड़ी कुतुबुद्दीन अंसारी, भाजपा के लोकेंद्र चौहान व महान दल के गौहर इकबाल भी वोटों की जातीय गोलबंदी में लगे हैं।

नहटौर दोपहर 3 बजे
यहां खत्म हो रहे हैण्डलूम उद्योग को किसी के कुछ न करने का मलाल है। यहां से बसपा ने ओम कुमार को टिकट दिया है। उनके सामने हैं सपा के राजकुमार राजू। उनका दावा भी मजबूत है क्योंकि पिता मास्टर राम स्वरूप नजीबाबाद सीट से सीपीएम से लगातार 3 बार विधायक रहे हैं। पिछली बार राजू सपा के समर्थन के साथ सीपीएम के ही प्रत्याशी थे लेकिन इस बार वह साइकिल पर सवार हैं। भाजपा ने सुभाष वाल्मीकि व रालोद ने मुंशीराम पाल को उतारा है।

अफजलगढ़ 4.30 बजे
सीट खत्म हो चुकी है लेकिन अफजलगढ़ में नई सीट बढ़ापुर के सियासी चटकारे उफान पर हैं। सबसे ज्यादा चर्चा है महान दल से साधना सिंह की। न दल बड़ा, न नाम लेकिन इलाके में उनकी ही बातें। क्यों? जवाब देते हैं यहां के सुधीर- मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा के चार बार के विधायक व भाजपा के दबंग नेता कुंवर सर्वेश कुमार इस बार यहां आना चाह रहे थे। लेकिन भाजपा की मजबूरी थे अफजलगढ़ से चार बार के पूर्व विधायक डॉ इन्द्रदेव। भाजपा ने उन्हें यहां से और सर्वेश को ठाकुरद्वारा से टिकट दिया। कुंवर नाराज हो गए, यहां अपनी पत्नी साधना सिंह को महान दल से उतार दिया। बसपा के विधायक मो. गाजी, भाजपा के डॉ. इन्द्रदेव के साथ महान दल की साधना सिंह भी मुकाबले में हैं। सपा ने कफील अंसारी व कांग्रेस ने हुसैन अंसारी  मुस्लिम वोट अपने पाले में करने में लगे हैं।

शेरकोट- 5.30 बजे
धामपुर से राहुल गांधी की सभा से आए लोगों में चर्चा चल रही है। अश्वनी सिंह सवाल करते हैं कि राहुल ने तो किसानों का जिक्र तक नहीं किया? धामपुर सीट के इस इलाके में बाढ़ की बर्बादी के चर्चे हैं। रामगंगा से होने वाले विनाश की बातें हैं। यहां से बसपा विधायक अशोक राना, पूर्व विधायक मूलचंद और भाजपा ने राजेन्द्र सिंह को मैदान में उतारा है वहीं कांग्रेस ने अनवर जमील को उतार कर मुसलमान वोटों की गोलबंदी की है।

नगीना- 6.15 बजे
पुरानी सीट। प्रत्याशी भी पुराने। उद्योग भी वही। सहारनपुर जैसी काष्ठकला नगीना की भी थाती है लेकिन कोई सरकारी मदद और बिजली की आवाजाही से यह उद्योग दम तोड़ता नजर आ रहा है। पप्पू चौधरी कहते हैं-जब खुद खाना है और खुद ही मदद करनी है तो काहे का विधायक? जबकि यहां से लगातार 3 बरस से एक ही विधायक जीत रही हैं। बसपा ओमवती को यहां से फिर आजमा रही हैं। उन्हें टक्कर दे रहे सपा के मनोज पारस, भाजपा के लवकुश कुमार और कांग्रेस के प्रत्याशी पूर्व ब्लाक प्रमुख फूल सिंह।

नजीबाबाद 7.20 बजे
जातीय वोटों की गोलबंदी देखनी हो तो यह सीट दिलचस्प है। बसपा ने तसलीम अहमद, सपा ने मो. शाहिद और रालोद नेअबरार आलम को यहां से उतारा है वहीं भाजपा ने राजीव अग्रवाल को टिकट दिया है। शाहिद  कहते हैं-मुस्लिम वोट तीन में बंटा तो चौथे को फायदा न हो जाए।

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