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एक्जिट पोल के नतीजों ने बढ़ाई कांग्रेस में हलचल

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के एक्जिट पोल में कांग्रेस को जीत हासिल करते दिखाये जाने के बाद पार्टी की राज्य इकाई में मुख्यमंत्री पद के लिये लाबिइंग शुरू हो गयी है। पार्टी प्रवक्ता सुरेन्द्र कुमार ने स्वीकार किया कि शीर्ष पद के लिये कवायद शुरू हो गयी है। उन्होंने कहा कि स्वाभाविक है कि हर कोई प्रयास करेगा।
   
राज्य के नेता नयी दिल्ली में डेरा डाल रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि पार्टी उच्चकमान को राज्य इकाई का नया नेता चुनने में काफी दिक्कत आयेगी क्योंकि वह विभिन्न गुटों में विभाजित है। 2002 के विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार स्थिति अलग है। तब पार्टी के दिग्गज नेता नारायण दत्त तिवारी को मुख्यमंत्री के लिये चुना गया था। इस बार खराब स्वास्थ्य और कुछ अदालती मामलों के बारे में वह पहले ही दौड में नहीं हैं। उनके बाद तीन शीर्ष नेता हरीश रावत, सतपाल महाराज और विजय बहुगुणा में से किसी एक के नाम पर विचार हो सकता है।
 
चूंकि तीनों नेता लोक सभा के सदस्य हैं इसलिये हो सकता है पार्टी उच्च कमान उनके नाम पर विचार नहीं करे। सूत्रों के अनुसार विपक्ष के नेता हरक सिंह रावत, इंदिरा हृयदेश और यशपाल आर्या के नाम पर भी विचार हो सकता है। पार्टी नेता हालांकि रावत के रूद्रप्रयाग से जीतने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। उन्हें सिंचाई मंत्री मतबर सिंह कंडारी से कडी टक्कर मिली है। रावत के हारने की सूरत में पार्टी उच्चकमान की पसंद में आर्या और तिवारी समर्थित हृदयेश रह जायेंगी। लेकिन तिवारी गुट के कटटर विरोधी हरीश रावत गुट ने पहले ही दलित नेता बताकर आर्या का विरोध शुरू कर दिया है। रावत के करीबी एक सूत्र ने बताया, उत्तराखंड में अग्रणी जातियों की बहुलता है। लिहाजा स्वाभाविक तौर पर हमें केवल अग्रणी जाति से ही नेता चुनना होगा। एक शीर्ष कांग्रेस नेता ने कहा, कौन होगा अगला मुख्यमंत्री यह बडा सवाल है।

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