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'आज का लाहौर 50 साल पुरानी दिल्ली जैसा'

लाहौर में अपनी अगली योजना 'द रिलक्टेंट फंडामेंटालिस्ट' की शूटिंग कर रहीं फिल्मकार मीरा नायर ने कहा है कि शूटिंग के लिए लाहौर हालांकि असुरक्षित है लेकिन यह पुरातन सौंदर्य के लिहाज से 50 साल पुरानी दिल्ली जैसा है।

नायर ने लाहौर में चार दिनों तक शूटिंग की लेकिन अब वह बाकी की शूटिंग नई दिल्ली में करेंगी। नायर ने माना कि पाकिस्तान में शूटिंग करना आसान नहीं। नायर ने कहा कि हम चार दिनों तक लहौर में शूटिंग करने में सफल रहे लेकिन बाकी की 20 दिनों की शूटिंग अब दिल्ली में होगी।

हमें लाहौर में पाकिस्तानी सदस्यों के साथ शूटिंग करनी पड़ी। वहां शूटिंग करना सुरक्षित नहीं था। लेकिन इसके बावजूद लाहौर काफी अच्छा लगा। यह 50 साल पुरानी दिल्ली जैसा है। दिल्ली पूरी तरह बदल चुकी है लेकिन हमें बीते जमाने की दिल्ली देखने का मौका लाहौर में मिल गया।

'द रिलक्टेंट फंडामेंटालिस्ट' पाकिस्तानी लेखक मोहसिन हामिद के उपन्यास पर आधारित है। इस उपन्यास में प्रिंसटन में शिक्षा प्राप्त और अमेरिका में नौकरी कर रहे पाकिस्तानी युवा और उसकी अमेरिकी प्रेमिका की कहानी बयां की गई है।

नायर को 'सलामी बॉम्बे', 'मॉनसून वेडिंग', 'वेनिटी फेयर', 'द नेमसेक' और 'अमीलिया' के लिए अंतर्राष्ट्रीय ख्याति मिल चुकी है। नायर उम्मीद करती हैं कि 'द रिलक्टेंट फंडामेंटालिस्ट' पाकिस्तान में भी रिलीज हो सकेगी।

नायर ने कहा कि मुझे पूरा यकीन है कि 'द रिलक्टेंट फंडामेंटालिस्ट' पाकिस्तान में भी रिलीज होगी। मैं राजनीतिक मुद्दों को लेकर कुछ नहीं कर सकती लेकिन पाकिस्तान और भारत के बीच उनमुक्त व्यापार को देखते हुए इस फिल्म पर कोई रोक लगने का अंदेशा नहीं दिखता।

नायर के मुताबिक पाकिस्तान के बारे में बात करते हुए वह अतीत में खो जाती हैं। बकौल नायर, ''मेरे पिता लाहौर से ताल्लुक रखते थे। मैं पाकिस्तानी तहजीब के हिसाब से बड़ी हुई। मैंने कव्वाली, शायरी, फैज अहमद फैज की शायरी के बीच होश सम्भाला है।

'द रिलक्टेंट फंडामेंटालिस्ट' में मैंने एक लम्बी कव्वाली रखी है। यह वास्तविक और पारंपरिक कव्वाली फरीद अयाज और अबू मोहम्मद द्वारा गायी गई है। मैं दिल्ली में भले ही बड़ी हुई लेकिन मेरे जेहन में आज भी लाहौर बसता है।

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