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सरकार की NCTC पर संसद में पहली जीत, भाजपा चित

लोकसभा में प्रस्तावित आतंकवाद निरोधक खुफिया केंद्र 'नेशनल काउंटर टेरोरिज्म सेंटर' (एनसीटीसी) पर विपक्षियों के तीन संशोधन प्रस्तावों के गिर जाने से सरकार को सोमवार को बड़ी राहत मिली।

एनसीटीसी के प्रावधानों का विरोध कर रही तृणमूल कांग्रेस के सदस्य मतदान का बहिष्कार करते हुए सदन से बाहर चले गए। इस तरह से उसने एक तीर से दो शिकार किया। एक ओर उसने संशोधन प्रस्तावों को गिराने में मदद की और गठबंधन सरकार को शर्मीदा होने से बचा लिया तो दूसरी ओर उस एनसीटीसी के पक्ष में भी मतदान नहीं किया। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के सांसदों ने भी सदन से बहिर्गमन किया।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा आतंकवाद की प्रभावी रोकथाम के लिए एजेंसी को जरूरी बताए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), वामपंथी दल और बीजू जनता दल (बीजद) ने संशोधन प्रस्ताव पेश किए।

प्रधानमंत्री राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई बहश का जवाब दे रहे थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एनसीटीसी पर राज्य सरकारों के साथ बातचीत जारी रहेगी और 16 अप्रैल को मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक से पहले इसे शुरू नहीं किया जाएगा।

विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने प्रस्ताव में संशोधन के प्रस्ताव पर मतविभाजन की मांग की, जो 141 के मुकाबले 226 मतों से गिर गया। एक सदस्य अनुपस्थित रहे।

दूसरा संशोधन प्रस्ताव मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के बासुदेव आचार्या ने रखा। उसका भी वही हस्र् हुआ। ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी बीजद ने तीसरा संशोधन प्रस्ताव रखा। वह भी गिर गया।

एनसीटीसी का गठन एक मार्च को किया जाना था, लेकिन इसमें देरी की गई, क्योंकि सभी गैर-कांग्रेस शासित राज्यों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इसका विरोध किया है।

 

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