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6 दिसंबर, 2020|7:28|IST

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सुनयना मट्टू खन्ना की सफलता के मंत्र

अपनी टीम में युवाओं और अनुभवी दोनों को बराबर जगह देने वाली सुनयना मट्टू खन्ना बजाज कैपिटल लिमिटेड के साथ जुलाई 2000 से जुड़ी हुई हैं। सुनयना ही बजाज कैपिटल लिमिटेड की सभी एचआर पॉलिसी बनाती हैं और उनका क्रियान्वयन करवाती हैं, जिसकी बदौलत ही आज बजाज कैपिटल लिमिटेड आर्थिक क्षेत्र का एक चमकता सितारा बना हुआ है। यह सुनयना की रणनीतियों का ही परिणाम है कि किसी समय छोटे स्तर पर काम करने वाली कम्पनी पहले से कहीं अधिक लोगों की कार्यक्षमता का इस्तेमाल कर रही है। सुनयना कहती हैं कि आप जितने अधिक जमीन से जुड़े होंगे, लोग उतना ही आप पर भरोसा रखेंगे, क्योंकि उन्हें लगता है कि आप उनके लिए हमेशा मौजूद हैं।

एग्जीक्यूटिव ट्रेनी के रूप में शुरुआत करने वाली सुनयना ने अपनी मेहनत के दम पर तीन-चार वर्षो में ही एचआर डिपार्टमेंट में मुख्य जिम्मेदारी हासिल कर ली थी। आज वह बजाज कैपिटल लिमिटेड की एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट एंड हेड हैं। सुनयना ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जन्तु विज्ञान की पढ़ाई की है। इसके बाद विज्ञान क्षेत्र से एकदम अलग, उन्होंने पुणे यूनिवर्सिटी से ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट में एमबीए किया। इसके अलावा सुनयना ने और कई छोटे-छोटे कोर्स भी किए। उन्होंने फाइनेंशियल प्लानिंग एसोसिएशन, डेनवर, यूएसए, से फाइनेंशियल प्लानिंग का शॉर्ट टर्म कोर्स किया। इसके अलावा उन्होंने इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, हैदराबाद से मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम और फोर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, दिल्ली से बैलेंस्ड स्कोर्ड का एक सर्टिफिकेट प्रोग्राम भी किया है।

वर्तमान में सबसे अधिक फाइनेंशियल सर्विसेज और प्रोडक्ट्स बेचने वाली कम्पनी बजाज कैपिटल लिमिटेड को सबके साथ मिल कर इस मुकाम तक लाने वाली सुनयना मट्ट् का मानना है कि आपको लोगों के सामने वही बातें कहनी चाहिये या करनी चाहिये, जो वह चाहते हैं। यही कारण है कि आज बजाज कैपिटल का वर्किंग नेटवर्क सबसे अच्छा है। एचआर रणनीतियों को अंजाम तक पहुंचाने के लिहाज से सुनयना को काफी सशक्त रणनीतिकार माना जाता है। ग्रुप सीईओ और बजाज कैपिटल के डायरेक्टर अनिल चोपड़ा कहते हैं कि सुनयना के काम करने का तरीका एकदम अलग है। वह युवाओं और अनुभवी लोगों को एक साथ लेकर काम करने में विश्वास रखती हैं और इसीलिए आज हम इस सेक्टर में अच्छा कर पा रहे हैं।

इसके अलावा सुनयना को उनके कार्यो के प्रति समर्पण और उपलब्धि के लिए कई सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है। 2010-11 में सुनयना को एम्प्लॉयर ब्रांडिंग अवार्डस की ओर से यंग एचआर एचीवर अवॉर्ड दिया गया था, जबकि 2010-12 में, वर्ल्ड एचआरडी कांग्रेस की ओर से यंग एचआर प्रोफेशनल ऑफ द इयर और इंदिरा ग्रुप ऑफ इंस्टिटय़ूट्स की ओर से इंदिरा सुपर एचीवर अवार्ड दिया गया था। सुनयना के ही एचआर संरक्षण में सबसे अधिक स्वीकार्य पॉलिसीज के आधार पर एसर द्वारा स्मार्ट प्लेस टु वर्क इन इंडिया का खिताब बजाज कैपिटल लिमिटेड को दिया जा चुका है।

बजाज कैपिटल लिमिटेड को बेहतर कार्यस्थल माहौल के लिए ग्रेट प्लेस टू वर्क इंस्टीटय़ूट, यूएसए की ओर से ‘ग्रेट प्लेस टू वर्क इन इण्डिया’ से सम्मानित किया जा चुका है।

सुनयना का मानना है कि उनके पंखों को अभी बहुत सारा आकाश समेटना है। तो आइये जानें सुनयना की सफलता के मंत्र। 

मेहनत करो
मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। काम चाहे छोटा हो या बड़ा, आप जहां कहीं पर भी, जिस किसी भी कड़ी में हों, अपने कार्य को पूरी लगन और मेहनत के साथ करते जायें। मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। यदि आप मेहनत नहीं कर रहे हैं तो भविष्य में आप अपने स्थान को बचा पाने में भी शायद ही सफल हो पायें। किसी भी कार्यस्थल पर निकम्मे लोगों की कोई जगह नहीं होती। सम्भव है कि ऐसे लोग कुछ दिन तक छूट पाकर वहां टिके रह जाएं, लेकिन यह उनके लिए घातक होगा। इसलिए मेहनत से कभी ना घबराएं, क्योंकि मेहनत करने वालों के ही ख्वाब पूरे होते हैं।

सदैव बड़ा सोचो
अधिकतर लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें अगर क्लर्क बना दिया जाये तो वह पूरी जिंदगी गुजार देंगे और आगे बढ़ने का कोई प्रयास नहीं करेंगे। ऐसे लोग कार्यस्थल के अलावा अपनी क्षमताओं के साथ भी न्याय नहीं कर पाते, जिससे वह सदैव उन छोटी-छोटी चीजों में अटके रहते हैं, जिनके लिए उनका वहां होना या ना होना कोई खास मायने नहीं रखता। इसके विपरीत, हमें अपनी सोच को खुला छोड़ देना चाहिए। इसका मतलब है कि अपनी सोच को सदैव बड़ा रखें, क्योंकि मौके भी उन्हीं को दिए जाते हैं, जिनके अंदर कुछ बड़ा करने की चाहत होती है।

मौका सबको मिलता है
अक्सर कार्यस्थल पर लोग यह कहते हुए मिल जाते हैं कि मैंने तो पूरी जिंदगी इसी पोस्ट और इसी सैलरी में गुजार दी। ऐसे लोग वे होते हैं, जो सही समय पर निर्णय नहीं कर पाते। मेरा मानना है कि मौका सबको मिलता है, हर व्यक्ति को उसकी प्रतिभा के अनुरूप मौका मिलता है, लेकिन कुछ लोग उस मौके को पहचान कर आगे बढ़ कर लपक लेते हैं और कुछ उसे पहचान ही नहीं पाते। इसलिए आपको अपने आंख-कान खुले रखने होंगे और सही मौके पर चोट करनी होगी। फिर जीत आपकी ही होगी।

सबको साथ लेकर चलना सीखो
अक्सर कार्यस्थलों पर लोग अलग-थलग बैठ कर अपनी खिचड़ी पकाते रहते हैं, जिससे कार्य का नुकसान तो होता ही है, साथ ही वे अपने चारों ओर के माहौल से भी अनभिज्ञ बने रहते हैं और उनकी नकारात्मक छवि भी बन जाती है। इसलिए कोशिश सदा यह करें कि सभी छोटे-बड़े लोगों को साथ लेकर चलें, जिससे आप में नेतृत्व करने की क्षमता का विकास होगा, जो आप तक अधिक मौके पहुंचाने में मदद करेगा। अब वह जमाना नहीं रहा, जब आप अकेले रह कर सारा काम निपटा सकें।

अपनी काबिलियत साबित करते रहो
अक्सर बहुत से लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें लगता है कि एक बार अगर हिट हो गए तो सदा के लिए कहानी बन गयी। अब तो सब मजे से चलता रहेगा। अक्सर ऐसे लोग यह भूल जाते हैं कि आपके क्षेत्र में हजारों लोग हर दिन आ रहे हैं। सबकी चाहत अपने आपको बेहतर साबित करने की होती है। इसलिए आपको अपनी किसी भी उपलब्धि पर अधिक समय ना गंवा कर आगे की नई रणनीति तैयार कर लेनी चाहिये, जिससे आप समय-समय पर अपनी क्षमता को साबित करते रहें। इससे आपके विकास-क्रम पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा और आप धीरे-धीरे आगे बढ़ते जाएंगे।

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