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26 मई, 2020|5:47|IST

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गूंगों की आवाज पर बहरा हुआ सदन

नई दिल्ली (वार्ता)। कहते हैं संसद सबकी सुनती है, उनकी जुबान भी उसे बोलनी चाहिए जिन्हें कोई तरजीह नहीं देता लेकिन गुरुवार को जब राज्यसभा में गूंगों और बहरों का मामला उठाया गया तो सदन सुनने को तैयार नहीं हुआ। सदन में प्रश्नकाल चल रहा था और घडी की सुइयां लगातार 12 के आंकड़े की ओर खिसक रही थीं। सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री मुकुल वासनिक अपने मंत्रालय से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे थे। वह देश के स्कूलों को विकलांगों के लिए बाधा मुक्त बनाने की जानकारी दे रहे थे। उनके लिए अगला सवाल मूक बधिरों की समस्याओं पर था। 11 बजकर 55 मिनट और 55 सेकंड पर भाजपा के राजीव प्रताप रूड़ी गूंगों और बहरों की समस्याओं से जुड़ा सवाल उठाने के लिए खड़े हुए तो सभापति मोहम्मद हामिद अंसारी ने प्रश्नकाल समाप्त करने की घोषणा कर दी। असहाय रूड़ी कहते रहे कि इस देश में 6 करोड लोग गूंगे हैं या बहरे हैं, उनकी कोई नहीं सुनता। लेकिन उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं था। प्रश्नकाल तो समाप्त हो चुका था।

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  • Web Title: गूंगों की आवाज पर बहरा हुआ सदन