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बिहार को स्पेशल पैकेज की मांग तर्कसंगत-सभापति बिहार पिछड़ा तो 2020

पटना(हि.ब्यू.)। बिहार विधान परिषद के सभापति ताराकांत झा ने कहा है कि बिहार सरकार द्वारा राज्य को स्पेशल पैकेज की मांग तर्कसंगत है। बिहार यदि पिछड़ा रह जाएगा तो भारत 2020 तक विकसित देश का गौरव पाने का लक्ष्य पूरा नहीं कर सकेगा। गुरुवार से शुरू परिषद के 163 वें सत्र के अपने प्रारंभिक संबोधन में सभापति ने कहा कि विगत वर्षो में बिहार की प्रगति उत्साहवर्धक है लेकिन इसमें और गति लाने की जरूरत है। सड़कें राज्य के विकास के लिए आर्थिक जीवन रेखा होती हैं, इस क्षेत्र में अच्छे कार्य हो रहे हैं। पर, राज्य के विभिन्न शहरों में जल जमाव, कूड़े-कचरे का जमाव, प्रदूषण एवं ट्रैफिक जाम चिंता के विषय हैं। सरकार को इस ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। बिहार का उत्तरी एवं पूर्वी भू-भाग प्राकृतिक विपदा से हर वर्ष जूझता रहता है जिस कारण यह अत्यधिक पिछड़ा है। इसके स्थायी निदान के लिए कालबद्ध योजना बनाकर शीघ्र एवं सक्रिय कार्यान्वयन की आवश्यकता महसूस होती है। सभापति ने इच्छा जताई कि विधान परिषद कार्य-संस्कृति का ऐसा मॉडल बने जहां से बिहार की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था प्रेरणा ग्रहण कर सके। उन्होंने कहा कि परिषद का यह शीतकालीन सत्र कुल छह बैठकों का है। यह लघु सत्र है फिर भी यह प्रयास किया जाएगा कि जनसरोकार तथा राज्य के विकास से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों को सदन के पटल पर लाया जाए। सभापति ने सदन के अंदर की कार्यव्यवस्था के तहत सुझाव स्वरूप कुछ प्रस्ताव भी दिए। उन्होंने कहा कि सरकार यदि प्रश्नों के लिखित उत्तर पहले भेज दे तो इससे सदस्यों को सहूलियत होगी तथा सदन में समय की बचत होगी। सदस्य प्रश्नों के उत्तर पहले से पढ़ लेंगे एवं आवश्यकता पड़ी तो पूरक पूछ लेंगे। नियम के अनुसार विधेयक की प्रतियां भी सदस्यों के बीच कम से कम दो दिन पहले वितरित हो जानी चाहिए ताकि उन्हें संशोधन देने का पर्याप्त अवसर प्राप्त हो। जिन विधेयकों में संशोधन प्रस्तावित हों उनके मूल रूप भी पहले ही वितरित हो जाएं ताकि इससे भी सदस्यों को सहूलियत हो। सभापति ने कहा कि राज्य की समस्याओं एवं सामाजिकता को दृष्टिगत करते हुए परिषद की तीन समितियां-शून्य काल समिति, बाल संरक्षण महिला सशक्तीकरण समिति एवं वृद्धजन संरक्षण एवं सुरक्षा समिति-गठित की गयी हैं। संसद ने 2007 में मेंटेनेन्स एण्ड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एण्ड सीनियर सिटीजन एक्ट पारित किया जो 31 दिसंबर 2007 को गजट में प्रकाशित होकर पूरे देश में लागू हुआ। वृद्धजनों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए यह अधिनियम है। राज्य सरकारों को इसके अंतर्गत कई दायित्व पूरे करने हैं इसलिए ऐसी समिति का गठन आवश्यक है।ं

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  • Web Title: बिहार को स्पेशल पैकेज की मांग तर्कसंगत-सभापति बिहार पिछड़ा तो 2020