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भेदभाव का शिकार हो रहा एचआईवी ग्रसित परिवार

उत्तर प्रदेश में चित्रकूट जिले के हडहा गांव में एक परिवार के सभी 10 सदस्य एचआईवी पॉजिटिव से ग्रसित हैं। भयभीत ग्रामीण इस परिवार को गांव से निकालने की मुहिम छेड़ रखी है। हैंडपम्पों तक से पानी नहीं भरने दिया जा रहा।जिले के बरगढ़ क्षेत्र के तुर्गवां ग्राम पंचायत के मजरा हडहा गांव में इस परिवार को फुटकर दुकानदार रोजमर्रा का सामान देने से मना कर चुके है। बेहद गरीबी का दंश झेल रहे इस परिवार के नन्दलाल (45), पत्नी उमा (4०), बेटा अरतिश (12) व अंकित (2), बेटी साक्षी (7), बड़ा भाई गोपाल (48), भाभी निशा (35), व मंझले भाई फूलचन्द्र (46) एवं भतीजा संजू (3) और भतीजी अंजू (5) एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। नन्दलाल ने बताया कि उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं है। सरकारी अस्पताल से दवाइयां तो मुफ्त में मिल जाती हैं, पर अस्पताल तक जाने के लिए किराये के लाले पड़ जाते हैं। उसकी पत्नी उमा का कहना है कि गांव के लोग हैण्डपम्प से पानी तक नहीं भरने देते और दुकानदार कुछ भी सामान देने से मना कर चुके हैं। वे गांव से निकल जाने को भी कहते है।वह इसकी शिकायत तहसील दिवस में आठ बार कर चुकी है। लेकिन किसी भी अधिकारी ने ग्रामीणों को नहीं समझाया। मुख्य चिकित्साधिकारी चित्रकूट डॉ़ आर.डी. राम ने बताया कि एचआईवी पॉजिटिव ग्रस्त इस परिवार का इलाज कमला नेहरू अस्पताल इलाहाबाद में कराया जा रहा है। प्रभारी अपर स्वास्थ्य निदेशक डा़ॅ गोपाल सिंह धानिक का कहना है कि एचआईवी से ग्रस्त रोगियों की स्वास्थ्य विभाग निगरानी करेगा। लखनऊ और इलाहाबाद स्थिति आईसीयू केन्द्रों में उनका इलाज किया जाएगा। इस परिवार के समुचित और नियमित इलाज की व्यवस्था की जा रही है। जिलाधिकारी वीएन राय का कहना है कि एचआईवी ग्रस्त परिवार के साथ किए जा रहे व्यवहार की जांच कराई जा रही है। गांव से निकालने की मुहिम छेंड़ने वालों को बक्सा नहीं जाएगा। मरीजों से हमदर्दी दिखाने की जरूरत है।

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