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तो क्या थर्मामीटर लेकर स्कूल जाएं टीचर

अगर आने वाले कुछ दिनों में यूटी स्कूलों के टीचर छात्रों की कॉपियों की जगह उनकी नब्ज जांचते नजर आएं या फिर यह कहते दिखे कि जिनको जुकाम है वो खड़े हो जाएं और जिनको बुखार है वो दीवार के साथ लग जाओ, तो हैरान मत होइएगा। स्वाइन फ्लू से डरे चंडीगढ़ प्रशासन ने शिक्षा विभाग को जो नया सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया है उसके लागू होने पर अपनी नौकरी बचाने के लिए टीचर्स को यही सब करना होगा। सर्कुलर के अनुसार यह सुनिश्चित किया जाए कि क्लास टीचर हर छात्र के स्वास्थ्य को जांचे। अगर किसी बच्चों को सर्दी, जुकाम या बुखार है तो इसकी सूचना प्रिंसिपल को दे। बच्चों को घर भेजने का प्रबंध किया जाए। अगर कोई टीचर्स इन कामों में कोताही बरतेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्कूल प्रबंधन गाइडलाइन्स कितना फॉलो कर रहा है, इसकी जांच डीईओ स्तर की कमेटी हर दिन स्कूलों में जाकर औचक्क निरीक्षण भी करेगी। इस दौरान वे हर दिन बीमार बच्चों वाली लिस्ट रिपोर्ट को भी क्रॉस चैक करेंगे। वैसे मजेदार बात यह है कि प्रशासन कोई ठोस कदम उठाने की बजाय गाइडलाइन्स ही जारी कर रहा है। उसका जोर स्वास्थ्य विभाग की बजाय शिक्षा विभाग को ही स्वाइन फ्लू रोकने की जिम्मेदारी ज्यादा देने पर है। सर्कुलर पे सर्कुलरस्वाइन फ्लू से बच्चों को बचाने के लिए प्रशासन गाइडलाइन्स पे गाइडलाइन्स देकर ही अपनी जिम्मेदारियों की इतिश्री कर रहा है। शनिवार को गृह सचिव रामनिवास ने फिर नए आदेश दिए और शिक्षा विभाग को उक्त सर्कुलर जारी करने के निर्देश दे दिए जिसमें टीचर्स पर कार्रवाई करने तक की बात है। क्या है नए सर्कुलर मेंशिक्षा सचिव द्वारा जारी तीसरेसकुर्लर में अब हर क्लास टीचर को अपने बच्चों की सुबह स्क्रीनिंग करनी होगी। यदि उनमें बुखार, सर्दी, जुकाम जैसे कोई भी लक्षण दिखे तो उनकी रिपोर्ट बनाकर पिं्रसिपल को सुबह हाजरी से पहले एक घंटे में जमा करनी होगी। साथ ही उस बच्चों को एक हफ्ते की छुट्टी पर भी भेजना होगा। स्कूल प्रबंधन आदेश का कितना पालन कर रहे हैं, इसकी डीईओ स्तर की कमेटी हर दिन औचक्क निरीक्षण में जांच भी करेगी। यदि कमेटी को कोई बीमार बच्चाा मिलता है तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ अनुशानात्मक कार्रवाई के भी आदेश दिए गए हैं। तो ये है स्वाइन फ्लू बढ़ने का कारणगृह सचिव रामनिवास का कहना है कि स्वाइन फ्लू के मामलों में वृद्धि का मुख्य कारण पेरेंट्स, छात्रों व स्कूल प्रबंधन का जागरूक न होना है। देखने में आया है कि बच्चों लगातार बीमारी की हालत में स्कूल, इंस्टीटय़ूट में जाकर क्लास अटेंड कर रहे हैं और अन्य बच्चों से मिलजुल रहे हैं। इसके चलते यह बीमारी दूसरे बच्चों तक बढ़ रही है। यूनिट टेस्ट बाद में लेने का आग्रहशिक्षा सचिव ने स्कूल प्रबंधन से आग्रह किया है कि जिन बच्चों को बीमार होने के चलते घर में रहने की सलाह दी गई हैं, उनके यूनिट टेस्ट बाद में ले लिए जाएं। क्योंकि पेरेंट्स बच्चों को पढ़ाई और यूनिट टेस्ट मिस न होने के चलते बीमारी की हालत में भी स्कूल भेज रहे हैं। कोचिंग सेंटरों पर भी नजरशहर के सभी कोचिंग सेंटर को 1 हफ्ते में बच्चाा का ओके सर्टिफिकेट स्वास्थ्य विभाग के पास जमा कराना होगा। यदि उनका कोई भी बच्चा बीमार पाया गया तो 2 हफ्ते उन्हें सेंटर बंद करना पड़ेगा। इसके अलावा कोचिंग सेंटरों का भी औचक्क निरीक्षण होना चाहिए।क्या कहते हैं डीईओशिक्षा सचिव के आदेशों को सोमवार से पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा। स्कूलों व शिक्षण संस्थानों की औचक्क निरीक्षण में जाकर जांच होगी कि वे नियमों के तहत कितना काम कर रहे हैं। यदि कोई आदेश नहीं मानता है तो फिर उनके खिलाफ अनुशानात्मक कार्रवाई होगी। डीईओ चंचल सिंह, यूटी शिक्षा विभागदो बार पहले भी भेजा था सकुर्लरयूटी शिक्षा विभाग ने सबसे पहला सकुर्लर जुलाई माह में स्कूलों को भेजा था। इसमें गाइडलाइन्स को फॉलो करने का आदेश दिए गए थे। इसके बाद अगस्त माह में दूसरा सकुर्लर फिर भेजा गया। इसमें स्कूल प्रबंधन को आदेश दिया गया था कि वे बीमार बच्चों के परिजनों को बुलाए और अस्पताल में जांच के बाद एक हफ्ते की छुट्टी पर भेज दें। इसके अलावा पर्चियों के माध्यम से भी मानिर्ग असेंबली में छात्रों को फ्लू से बचने के लिए जागरूक करने का आदेश था।गौर हो कि ‘ हिन्दुस्तान ’ ने बुधवार (11नवंबर) को ‘बच्चों का रिकॉर्ड नहीं रख पाया शिक्षा विभाग ’ खबर लगाई थी। इसमें बताया गया था कि स्कूलों में स्वाइन फ्लू से संबंधित गाइडलाइन्स का पालन नहीं हो रहा है। न तो बच्चों की स्क्रीनिंग हुई और न ही बीमार बच्चों को घर वापस भेजा जा रहा है। इसमें शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में जाकर जांच न करना प्रमुख कारण रहा है।

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