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ग्रीन हाउस में उगायी जाएंगी सब्जियां

राज्य में सब्जियां उगाई जाएंगी अब ग्रीन हाउस में। फूलों की खेती भी की जा सकेगी इस विधि से। श्रम और पानी की बचत होगी साथ में उत्पादकता भी दूनी हो जाएगी। फिर नहीं होगी सब्जियों की किल्लत और नियंत्रित रहेंगे इसके भाव भी। फूलों के मामले में भी दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम होगी। अभी प्लास्टिक के चादर और धागों से अस्थाई ग्रीन हाउस बनाये जा रहे हैं।सफलता मिली तो हरे बांस के फट्टों से स्थाई निर्माण होगा। राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा ने अपनी इस योजना पर काम शुरू कर दिया है। राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा और पांच किलोमीटर के रेडियस में पड़ने वाले गांवों में यह प्रयोग कर रहा है। विश्वविद्यालय का मानना है कि ग्रीन हाउस में सब्जियों की खेती करने से इसमें लगने वाले श्रम में 60 प्रतिशत की कमी आ जाएगी।खाद और पानी की खपत भी कम हो जाएगी। कुलपति डा. मेवा लाल चौधरी बताते हैं कि ग्रीन हाउस में खेती करने से बीमारियों का प्रकोप भी कम हो जाता है। पटवन ड्रीप विधि से की जाती है और खाद का छिड़काव भी उसी तरह घोल बनाकर किया जाता है। यह ऐसी विधि है जो सेल्फ रेगुलेटेड है। उन्होंने बताया कि खेत चारो ओर से प्लास्टिक के चादर, धागे या बांस से घिरा होता है।ऊपर से भी ढंक दिया जाता है। पौधे समान्य वातावरण से अलग रहते हैं। जरूरत के अनुसार उन्हें धूप व पानी मिल जात है। टेंपरेचर भी मेंटेन रहता है। अनावश्यक केमिकल के प्रकोप से अलग रहने के कारण उत्पादकता दो गुनी हो जाती है। श्री चौधरी ने बताया कि अगले वर्ष इस विधि का विस्तार कषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से राज्यभर में कराया जाएगा।

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