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कृषि उपकरणों की बिक्री में चल रहा है कर चोरी

कृषि उपकरणों की सरकारी और खुले बाजार की कीमतों में अंतर ने कर चोरी का एक नया मामला उजागर कर दिया है। उपकरण विक्रेता सरकार से तो कीमत वैट के साथ वसूलते हैं लेकिन जब कोई किसान सीधे खरीदने जाता है तो उसे बिना वैट जोड़े कीमत लेकर सामान मुहैय्या कर देते हैं। कंपीटीशन के माकेट में अपनी बिक्री बढ़ाने के ख्याल से विक्रेताओं द्वारा किये जा रहे इस घालमेल को कृषि मंत्री रेणु कुमारी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि वे उपकरण विक्रेताओं पर गहरी नजर रखें। जरूरत पड़े तो वणिज्यकर विभाग से भी इस संबंध में बात करें। उन्होंने गहरई से जांचकर इस रैकेट का खुलासा करने को कहा है। किसानों से भी उन्होंने अपील की है कि बिना रसीद उपकरण न खरीदें। यह उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो सकता है। कृषि उपकरणों के अधिसंख्य विक्रेता सरकार और किसान से अलग-अलग- रेट वसूलते हैं। उनके इस खेल से सरकार को राजस्व की क्षति तो हो ही रही है उसकी साख पर भी बट्टा लग रहा है। सरकारी योजनाओं में किसानों को लाभ नहीं दिखता और वे खुले बाजार से उपकरण खरीद लेते हैं। अनुदानित दर पर जितने में सरकार किसानों को उपकरण देती है कमोबेश उतनी ही कीमत पर किसानों को उपकरण बाजार में भी मिल जाते हैं। ‘हिन्दुस्तान’ ने जब इस खेल को उजागर किया तो कृषि मंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए इसकी तह में जाने की कोशिश की। जानकारी हुई कि विक्रेता अधिसंख्य किसानों को कच्ची रसीद पर उपकरण बेचते हैं। इससे उन्हें कर का भुगतान नहीं करना पड़ता और कम कीमत पर उपकरण किसानों को मिल जाता है।

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