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कैरेक्टर फैक्टर

चरित्र परिवर्तनशील है। लीडर की जुबान सरीखा बदलाव होता रहता है। आज आप जिसको चरित्रवान घोषित करते हुए थक नहीं रहे, पूरे शहर में जिसकी सज्जनता का ढिंढोरा माइक-साइक लगाकर पीटा जा रहा, कल वही चौराहे पर सरेआम जूतों से पिटता नजर आता है। लोग उसके नाम पर थूकते हैं। भयंकर कमीना आदमी निकला यार! जिसे लंगोट का पक्का समझते थे, वह नंगों का ताऊ  निकला। चरित्र का मसला नितांत संशयात्मक है। यूं भी चरित्र को लेकर लोगों की मान्यताएं कुछ विचित्र किस्म की हुआ करती है। मानव-तन में इसका स्थान कहां पर है, इस मोरचे पर भी गहरे मतभेद पाए गए हैं।

बहरहाल, यह शरीर के भीतर या बाहर जहां पर भी निवास करता हो, इसके जन्मकाल से शंकाएं ही शंकाएं हैं। अपने यहां किसी के भी चरित्र को लेकर कुछ एक जुमले बड़ी आसानी से उछाल दिए जाते हैं। मसलन, वह गिरे कैरेक्टर का है। उसका चरित्र कमजोर है। अलबत्ता चरित्र है ही नहीं, और है तो संदेहास्पद। लूज कैरेक्टर का है। लोगबाग यहां तक कह डालते हैं कि अब पहले जैसे कैरेक्टर वाले लोग मिलते ही कहां हैं? ऐसा मालूम पड़ता है, जैसे पहले के सारे के सारे लोग चरित्रवान ही तो पैदा हुआ करते थे! यहां पर कल तक सतयुग चल रहा था और कलियुग बेचारा आज ही आया है।अंग्रेजी की एक कहावत में चित्रित है कि चरित्र गया तो समझो सर्वस्व चला गया। मैंने भी बचपन में पढ़ा था, जिसके चलते कैरेक्टर को एक मजबूत चीज समझता था। अब लगता है, यह एक पिद्दीनुमा पदार्थ है। जरा-जरा सी बात पर लुढ़क लेता है। हजार में ढूंढो तो शायद एकआध के पास ही सही-सलामत निकलेगा।
  
फिल्म लाइन में, अजी क्या बात करते हैं, होता ही नहीं है। बिजनेसमेन के यहां, उल्टा सीधा नहीं करेंगे तो लंगर में खाएंगे क्या! राज नेताओं के पहलू में तो चरित्र टटोलने पर भी नजर नहीं आता है। टीचर, लॉयर, इंजीनियर, कांट्रेक्टर, डॉक्टर, सरकारी अफसर सबके यहां सब कुछ है। हां, अगर एक चीज का टोटा है तो वह है कैरेक्टर। अपने यहां की पुलिस के बारे में तो खैर कहने ही क्या? हलके का हर शातिर गिरहकट गवाही देने को तैयार मिलता है। वारदात के पहले या बाद में वह थाने में खुद आता है। कैरेक्टर तस्दीक करके चला जाता है। आज जब मौजूदा युवा पीढ़ी के चारित्रिक बदलाव, जिसे कुछ लोग पतन भी कहते हैं, पर संस्कृति की रक्षा की आड़ में टेसुए बहाए जाते हैं। तब मुझे लगता है कि इस मुए कैरेक्टर की विशेषता ही यह है कि हर कोई इसे दूसरों में ही तलाशता है।

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