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31 मई, 2020|4:43|IST

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लाखों खर्च मगर निर्मल नहीं हुए अंबेडकर गांव

माया सरकार की पहली प्राथमिकता होने के बाद भी अंबेडकर ग्रामों की तस्वीर बदलती नहीं दिखाई दे रही। अफसरों को ऐसे हर एक गांव में घर-घर सरकारी खर्च पर शौचालय बनवाने को कहा गया था। इसके लिए शासन ने लाखों की रकम भी उपलब्ध करा दी थी। इसके बाद भी अफसर अपना काम पूरा नहीं कर पाए।

सरकारी मशीनरी की ढिलाई से ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम पर ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है। विकास की दौड़ में सबसे आगे गाजियाबाद जिले ने पिछली साल ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम में प्रदेश के बाकी जिलों को पटखनी दी थी। गाजियाबाद में कुल ग्रामों की संख्या 405 ग्राम है। पहले इनमें से 39 को अंबेडकर ग्राम के रूप में चुना गया था।

हर साल इसी तरह से नए अंबेडकर ग्रामों का चयन करता है और प्रशासन ऐसे सभी ग्रामों में वरीयता से विकास कार्य करता है।  गाजियाबाद के लिए गौरव की बात थी कि पिछले सत्र में गाजियाबाद के 49 ग्राम प्रधानों को बेहतर स्वच्छता के लिए निर्मल ग्राम पुरुष्कार मिला था।

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इन सभी प्रधानों को हरियाणा बुलाकर सम्मानित किया था। इसके बाद अफसरों ने घोषणा की थी कि अगली बार जिले के कम से कम सौ और ग्रामों को निर्मल ग्राम बनाने की कसरत की जाएगी।
स्वच्छता कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए शासन ने पंचायत राज विभाग गाजियाबाद को लाखों की रकम भी भेजी थी।

इस पैसे से चुने गए ग्रामों में हर आदमी के घर में शुष्क शौचालय बनाने का टार्गेट दिया गया था। अंबेडकर ग्रामों में रहने वाले गरीबी की रेखा से नीचे के सभी लोगों को शौचालय निर्माण के लिए 4540 की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जानी थी।

ऐसे लोगों को सिर्फ चार सौ रुपये ही खर्च करने थे। गरीबी की रेखा से ऊपर के दस फीसदी लोगों को भी इस योजना का लाभ दिया जाना था। इसके बाद भी अभी तक स्वच्छता कार्यक्रम अपना मुकाम नहीं पा सका। सभी घरों में शौचालय आज तक नहीं बन सके हैं।

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