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पहले भी भाग्य आजमाते रहे हैं पूर्व नक्सली

झारखंड में लोकसभा या फिर विधानसभा का चुनाव हो, यहां पूर्व नक्सली अपना भाग्य आजमाते रहे हैं। लोकसभा के चुनाव में तो पलामू सीट पर पूर्व नक्सली कामेश्वर बैठा चुनाव जीते भी थे। विधानसभा के चुनाव में कई पूर्व नक्सलियों ने भाग्य आजमाया है।

इस बार के चुनाव में लातेहार सीट से भाजपा ने नारायण भोक्ता उर्फ आदित्य भोक्ता को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन लातेहार के सदर थाना में मुकदमा दर्ज होने के कारण टिकट वापस ले लिया गया। टीपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू का भाई गणेश गंझू भी इस बार जेवीएम की टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। भाजपा के पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता पर नक्सलियों से नजदीकी रिश्ते होने के आरोप लगते रहे हैं।

दो नक्सली संगठन चलाने के आरोपी पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव जेल में हैं और कांग्रेस से उनका टिकट कटना लगभग तय है। जुगल पाल भी इस बार चुनाव लड़ सकते हैं। खूंटी से मासी चरण पूर्ति पहले भी चुनाव लड़े हैं। इसके अलावा आपराधिक पृष्ठभूमि के नेता भी चुनाव मैदान में भाग्य आजमाते रहे हैं। कांग्रेस से विदेश सिंह को टिकट मिला है। उनपर कई आरोप हैं। रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल के करीबी होने के आरोप में दो मंत्रियों से पूछताछ हो चुकी है। दोनों इस बार भी बड़े दोलों की टिकट पर चुनाव मैदान में होंगे। साथ ही कई और ऐसे चेहरे हैं, जिनपर गंभीर आरोप लगते रहे हैं। पीएलएफआइ के समर्थन में एनोस एक्का लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। इस बार विधानसभा में भी समर्थन चाह रहे हैं। विधायक पौलुस सुरीन की पृष्ठभूमि भी पीएलएफआइ से जुड़ा है। हालांकि जो भी नेता अब चुनाव मैदान में हैं, उनके खिलाफ न्यायालय में मामला लंबित हो सकता है, लेकिन सभी जमानत पर हैं।

क्या कहा नारायण भोक्ता ने
लातेहार के भाजपा के पूर्व उम्मीदवार नारायण भोक्ता का कहना है कि उन्हें राजनीतिक साजिश का शिकार बनाया गया है। नवंबर 2013 में वे लोहरदगा में आत्मसमर्पण कर चुके थे। 10 अप्रैल 2014 को उन्हें जमानत मिली। लोहरदगा और लातेहार के एसपी ने यह लिखकर दिया है कि अब उनके खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है। इसी बीच लातेहार के रिचुगढ़ा में टीपीसी ने एक घटना को अंजाम दिया। इसमें अन्नू यादव सहित तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में नारायण भोक्ता का नाम भी जुड़ा और इसी कारण भाजपा ने सिंबल वापस ले लिया। उनका कहना है कि जब वे जेल में थे, तब इस मामले की जानकारी उन्हें क्यों नहीं दी गई।

 

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