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अप्रेजल बॉडीज के अनुमोदन पर वित्तमंत्री की संस्तुति अनिवार्य

अप्रेजल बॉडीज के अनुमोदन पर वित्तमंत्री की संस्तुति अनिवार्य

केंद्र सरकार ने सभी मंत्रालयों को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि कैबिनेट की संस्तुति के लिए भेजे जाने वाले नोट पर मूल्यांकन करने वाली अप्रेजल बॉडीज की संस्तुति के बावजूद वित्तमंत्री का अनुमोदन जरूरी होगा। यानी जिन मामलों में अप्रेजल बोर्ड की मुहर लगी होगी उसे भी वित्तमंत्री की स्वीकृति के बिना आगे नहीं बढ़ाया जा सकेगा।

कैबिनेट सचिवालय की ओर से सभी मंत्रलयों के सचिवों को 17 अक्टूबर को भेजे गए पत्र में साफ कहा गया है व्यय वित्त समिति - ईएफसी,पब्लिक निवेश बोर्ड - पीआईबी,विनिवेश के लिए कोर समूह - सीजीडी, एक्सपेंडेड बोर्ड आफ रेलवे - ईबीआर, विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड - एफआईपीबी, सार्वजनिक - निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति ,संचार आयोग, सड़क परियोजनाओं से जुड़ी उच्च अधिकार समितियों आदि अप्रेजल बोर्ड की ओर से मिली संस्तुति के बाद भी इसे कैबिनेट में ले जाने से पहले वित्तमंत्री का अनुमोदन लेना जरूरी होगा।

स्पष्ट लिखना होगा
कैबिनेट नोट में यह स्पष्ट रूप से लिखना जरूरी होगा कि अप्रेजल बॉडी की संस्तुति और मिनट्स पर वित्तमंत्री की संस्तुति ले ली गई है। वित्तमंत्री का अनुमोदन नहीं होने की स्थिति में इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। एक अधिकारी ने कहा,अमूमन ऐसे मामलों में जहां वित्तीय चिंताएं शामिल होती हैं वित्तमंत्री के पास फाइल भेजी जाती है।

केंद्र सरकार ने कैबिनेट नोट से जुड़े मामलों में  वर्ष 2008 में जारी किए गए दिशा निर्देश में अप्रेजल बॉडीज की भूमिका को स्पष्ट किया था। सूत्रों ने कहा कि सरकार के कई महकमे अप्रेजल बॉडी का अनुमोदन लेने के बाद भ्रम के चलते संबंधित मंत्रलय के जरिए कैबिनेट नोट पीएमओ को भेज देते हैं। कैबिनेट में ले जाने से पहले वित्तमंत्री का अप्रूवल लेने की प्रक्रिया में भी कई बार हीलाहवाली होती है। लिहाजा नए निर्देशों में साफ किया गया है कि इसे स्पष्ट रूप से लिखकर बताया जाए कि वित्तमंत्री ने उसे अनुमोदित किया है।

जेटली पर पीएम को भरोसा
सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सरकार के कामकाज में अरुण जेटली को काफी प्रभावशाली भूमिका में रखा है। वे चाहते हैं कि ऐसे मामलों में जिसके दूरगामी वित्तीय प्रभाव होते हैं कहीं कोई चूक न रह जाए इसलिए वित्तमंत्री उन मामलों को स्वंय देखें जो कैबिनेट से संस्तुति की कतार में शामिल होते हैं।

जवाबदेही चाहते हैं पीएम
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री चाहते हैं कि सरकार के कामकाज में जवाबदेही साफ तौर पर तय होना चाहिए। वित्तीय मामलों को लेकर सरकार बहुत ही सख्त है। लिहाजा प्रधानमंत्री ने स्पष्ट तौर पर सभी मंत्रलयों को आगाह किया है कि वे वित्त से जुड़े मामलों में बेहद सावधानी से फैसले लें।

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