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..कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी

सीमा पर संकट, सेना पर सवाल, संविधान की धज्जियां, सरकारें लाचार और रुपया धड़ाम। यह हालात आपको कुछ मायूस कर सकते हैं। पर यह तस्वीर का सिर्फ एक पहलू है। यह भी सच है कि ..कुछ बात है जो हस्ती मिटती नहीं हमारी, बरसों रहा है दुश्मन दौरे जहां हमारा। आजादी की वर्षगांठ का 66वां जश्न मनाते हुए आइए क्यों न हम देश की संप्रभुता के इन पंचतत्वों के सूरतेहाल पर नजर डालें। पेश है ‘हिन्दुस्तान’ का खास आयोजन।

दल कमजोर, लोकतंत्र मजबूत
कांग्रेस को आजाद भारत की जनता ने चुनावी सियासत में स्वाभाविक तरजीह दी। लेकिन वक्त के साथ बढ़ती अपेक्षाओं ने एक दल की सरकार के बरअक्स बहुदलीय गठबंधन सरकारों का मार्ग प्रशस्त किया, जिससे दल भले ही कमजोर हुए, मगर लोकतंत्र मजबूत हुआ।

बने नए कानून, बढ़े अधिकार
संविधान ने आम आदमी के अधिकारों में लगातार इजाफा किया है। आजादी के 66 सालों में संविधान में 118 संशोधन किए जा चुके हैं। बच्चों को नि:शुल्क व अनिवार्य शिक्षा, सूचना का अधिकार कानून और राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) जैसी अहम चीजें लागू हैं।

दुरूह सरहद, हौसले बुलंद
भारत की 15,106.70 किलोमीटर भूभाग सीमा और 7,516.60 किलोमीटर समुद्री सीमा है। सीमा को लेकर पाकिस्तान और चीन के साथ कश्मीर, अक्साई चीन, लद्दाख और अरुणाचल जैसे क्षेत्रों में विवाद भी हुए हैं, जिनमें से कुछ मौकों पर जंग भी हो चुकी है। वर्तमान पड़ोसियों में चीन और पाक के अलावा अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका और मालदीव है। भारत जब आजाद हुआ तब बांग्लादेश नहीं था। वर्ष 1971 में पाक से आजाद होकर बांग्लादेश बना।

तीसरी सबसे बड़ी फौज
आजादी के समय भारतीय सेना में 4.07 लाख सैनिक थे। वर्तमान में 13.25 लाख सक्रिय सैनिक हैं। आज हम दुनिया की तीसरी बड़ी सेना हैं। चार युद्ध लड़ने वाली हमारी सेना ने आजादी के बाद से खुद को काफी आधुनिक किया है और बड़ी मिसाइलों से लेकर उन्नत किस्म के लड़ाकू विमान हमारे पास हैं। इसके लिए काफी धन की भी आवश्यकता है। इस साल रक्षा बजट में पिछले साल के मुकाबले 14 फीसदी की वृद्धि की गई। भारत के पास 80-100 सक्रिय परमाणु हथियार मौजूद हैं। 92.74 करोड़ रुपये था पहला रक्षा बजट। इस वर्ष दो लाख करोड़ से अधिक हो गया है 

चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
आजादी के समय हमारी अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां थीं। तब रुपया अमेरिकी डॉलर के बराबर था, पर विकास और आत्मनिर्भरता के मामले में हम काफी पीछे थे। लेकिन सात दशक से भी कम समय में यह तस्वीर बदल चुकी है। बेशक आज रुपये की कीमत में गिरावट विश्व अर्थव्यवस्था में हमारी दावेदारी के जोखिम को दर्शाती है, मगर भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। उम्मीद है कि 2050 तक भारत चीन को पीछे छोड़ देगा।    
61.80 रुपये तक पहुंच चुका है इस वर्ष एक डॉलर। 1947 में एक डॉलर का मूल्य एक रुपये था 

आजाद भारत की ऊंची उड़ान
इंटरनेट
16.5 करोड़ लोग इस्तेमाल करते हैं इंटरनेट (मार्च 2013), दुनिया में भारत का तीसरा नंबर

खेल
वनडे क्रिकेट में नंबर-1, टेस्ट में भी शीर्ष पर रहे, विश्वकप के तीनों संस्करण के इकलौते विजेता

रक्षा
05वां देश है जो बड़े विमानवाहक पोत (आईएनएस विक्रांत) बना सकता है
06वां देश है जो अंतर महाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइल (अग्नि पांच) बना सकता है

अंतरिक्ष
सेटेलाइट नेवीगेशन सिस्टम विकसित करने वाला अमेरिका व रूस के बाद तीसरा देश

विदेशी सेटेलाइट लॉन्च करने वाले चुनिंदा देशों में भारत भी। नवंबर, 2013 में मंगल अभियान के लिए इसरो तैयार। सफलता मिली तो दुनिया का तीसरा देश होगा।

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