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15 दिसंबर, 2019|7:22|IST

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काम को बार-बार दुहराते हैं, सावधान हो जाएं यह डिस्टोनिया है

काम को बार-बार दुहराते हैं, सावधान हो जाएं यह डिस्टोनिया है

डिस्टोनिया न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। इसके मरीज अक्सर अपनी दिनचर्या की गतिविधियों में भी असमर्थ हो जाते हैं। समय पर इलाज न कराया जाए तो मानसिक स्थिति काफी खराब हो सकती है, बता रहे हैं मेदांता मेडिसिटी के डायरेक्टर (न्यूरोलॉजी) डॉं.अरुण गर्ग

नसों के जरिये प्रत्येक अंग तक खून की सप्लाई, आंखों का झपकना, पाचन क्रिया आदि को दुरुस्त रखने का कार्य हमारा शरीर अच्छी तरह से तभी कर पाता है, जब कई सारी छोटी-छोटी गतिविधियां सही दिशा में कार्य करती हैं। यह एक प्रकार का चमत्कार ही है कि शरीर की ये सभी गतिविधियां निरंतर जारी रहती हैं, लेकिन एक छोटी-सी गड़बड़ी हमारी शारीरिक प्रक्रियाओं की सुव्यवस्थित प्रणाली को बुरी तरह से बाधित कर सकती है, जिस वजह से अनेक समस्याएं और अक्षमताएं उभर सकती हैं। डिस्टोनिया इसी प्रकार का एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। यह मांसपेशियों को विश्राम देने वाली हमारी न्यूरोलॉजिकल कार्यप्रणाली के उचित तरीके से काम नहीं करने के कारण पनपता है।

इसमें क्या होता है
इस बीमारी में हमारा मस्तिष्क मांसपेशियों को विश्राम करने का संकेत देना भूल जाता है और मस्तिष्क से इस प्रकार की संवादहीनता के कारण प्रभावित हिस्से की मांसपेशियां लगातार काम करती रहती हैं। इस वजह से इन गतिविधियों का प्रतिरोध करने वाली मांसपेशियां भी उनके साथ मिल कर काम करने लग जाती हैं।

क्षमता होती है कमजोर
यह डिसऑर्डर शरीर के किसी भी अंग में पनप सकता है। इससे आपकी सामान्य क्षमताओं में जबर्दस्त कमी आ सकती है। डिस्टोनिया सामान्य स्वास्थ्य को कमजोर कर सकता है और इससे पीडित व्यक्ति की उत्पादनशीलता में भी कमी आ सकती है।

कैसे होती है पहचान
डिस्टोनिया की पहचान मांसपेशियों में अनचाहे खिंचाव से होती है। इस कारण इनकी गतिविधियों में घुमाव और दोहराव या असामान्य हाव-भाव नजर आते हैं, जो कष्टकारी व बेढंगे लगते हैं।

तरह-तरह के डिस्टोनिया
बाल्यावस्था के डिस्टोनिया के लक्षण सबसे पहले पैरों और हाथों में नजर आते हैं। उसके बाद ये लक्षण बड़ी तेजी से शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंच जाते हैं। किशोरावस्था में यह विशेष रूप से शरीर के ऊपरी हिस्सों से शुरू होता है और फिर इसका प्रसार धीमा पड़ जाता है। किशोरावस्था में शुरू होने वाला डिस्टोनिया किसी एक ही हिस्से पर केंद्रित रहता है। फोकल डिस्टोनिया शरीर के एक हिस्से को प्रभावित करता है और सेगमेंट डिस्टोनिया शरीर के दो या अन्य अंगों को प्रभावित करता है।

क्या हैं कारण
डिस्टोनिया के कारणों के बारे में अब तक बहुत कम जानकारी मिल पाई है। डिस्टोनिया के लक्षण विशेष कार्यों में नजर आते हैं, मसलन लेखन, जिसे राइटर्स क्रैम्प (लिखने में कंपकंपी) कहा जाता है। वैसे यह आनुवंशिक भी हो सकता है। कुछ लोगों में डिस्टोनिया के लक्षण खास दवाओं, फेफड़े का कैंसर जैसे रूपों वाली कुछ बीमारियों के कारण भी पनपते हैं।

क्या है इसका इलाज
डिस्टोनिया का अब तक कोई इलाज नहीं निकल पाया है। कुछ हद तक इसकी वजह इसकी पैथोफिजियोलॉजी के बारे में कम समझ होना है, जिस कारण इसका उपचार सिर्फ लक्षणों पर केंद्रित है। इससे अनचाही गतिविधियों में कमी, असामान्य हावभाव में सुधार, दर्द निवारण आदि में सुधार हो पाता है।

बोटॉक्स से लाभ
बोटुलिनम टॉक्सिन (बीटीएक्स) थेरेपी में बैक्टीरियम क्लोस्ट्रिडियम बोटुलिनम से बनी न्यूरोटॉक्सिन मिश्रित प्रोटीन ओनाबोटुलिनम ए का इंजेक्शन नसों में दिया जाता है। यह मांसपेशियों तक पहुंचने वाली सूचना को जाम कर देता है। इससे निरंतर गतिविधि थम जाती हैं और मरीज को आराम महसूस होता है।

इन बातों का ध्यान रखें
लम्बे समय तक लगातार खड़े रह कर काम करते रहना कम कर देना चाहिए। यह सम्भव न हो तो बीच-बीच में पंजे के बल और एड़ी के बल रहने का प्रयास करें।

थोड़ी देर के लिए पैरों को शरीर के स्तर से ऊपर उठा कर आराम करें। सोते समय पैरों के नीचे तकिया या बिस्तर के निचले पायों के नीचे 2-2 ईंट रखवा लें।

गर्भावस्था के दौरान करवट से लेटने से शिरा (वेन्ज) में रक्त के प्रवाह में बाधा नहीं आती, जिससे वेरिकोज वेन्ज की शिकायत कम हो जाती है।

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