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डॉक्टर द्वारा यौन शोषण विश्वास का भारी हनन, अस्वीकार्य: कोर्ट

डॉक्टर द्वारा यौन शोषण विश्वास का भारी हनन, अस्वीकार्य: कोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि एक चिकित्सक द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान मरीज को यौन प्रताड़ित करना या मरीज के निजी अंगों को छूना विश्वास का भारी हनन है और यह अस्वीकार्य है।

नींद नहीं आने, सिर दर्द और त्वचा की समस्या से ग्रस्त एक लड़की 23 मई 2007 को होम्योपैथिक डॉक्टर के पास गई थी। इस मामले में डॉक्टर को मरीज के निजी अंगों को छूने के दोष में 18 महीने कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई थी। इसी मामले में डॉक्टर की याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने यह बातें कहीं।

न्यायमूर्ति जीपी मित्तल ने कहा कि विश्वास और अधिकार के स्थान पर होने के कारण एक फिजिशियन की ड्यूटी है कि वह मरीज के सर्वोत्तम हित में काम करे। विश्वास बनाए रखने के लिए एक फिजिशियन को यौन आचरणों से बचना चाहिए। चिकित्सक द्वारा मरीज के प्रति यौन आचरण करना या उसके निजी अंगों को छूना विश्वास का भारी हनन है और भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत यह गंभीर अपराध है। चिकित्सक द्वारा ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

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