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गीतिका मामला: आरोपियों के खिलाफ आरोप तय पर फैसला सुरक्षित

नई दिल्ली वरिष्ठ संवाददाता

बहुचर्चित गीतिका शर्मा खुदकुशी मामले के आरोपी हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल गोयल कांडा एवं उसकी कथित सहयोगी अरुणा चड्ढा के खिलाफ आरोप तय पर अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। रोहिणी स्थित जिला जज एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस के सरवरिया की अदालत आरोप तय पर 10 मई को निर्णय सुनाएगी। इससे पहले पुलिस ने अदालत में दावा किया कि उनके पास कांडा और चड्ढा के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पुख्ता इलैक्ट्रोनिक साक्ष्य मौजूद हैं जैसे कि ई-मेल, फोन कॉल डिटेल और अन्य दस्तावेज।

इन सबूतों के आधार पर साबित हो रहा है कि कांडा व चड्ढा ने गीतिका को आत्महत्या के लिए उकसाया था। एडशिनल पब्लिक प्रोसिक्यूटर राजीव मोहन ने अदालत में कहा कि कांडा का कर्मचारी चानशविरूप उसके खिलाफ सरकारी गवाह बन गया था। लेकिन बाद में वह देश छोड़कर भाग गया। इस मामले में कांडा और चड्ढा गत वर्ष अगस्त से न्यायिक हिरासत में जेल में है। इनके खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने, आपराधिक साजशि, जान से मारने की धमकी देने, सबूत मिटाने, कीमती दस्तावेजों के नकली दस्तावेज बनाना, धोखाधड़ी के लिए जालसाजी, सम्मान को चोट पहुंचाने के लिए जालसाजी, असली की जगह नकली दस्तोवजों का इस्तेमाल व सूचना एवं तकनीकी अधिनियम की धारा 66 के तहत आरोप है।

आरोपपत्र के अनुसार 23 वर्षीय गीतिका शर्मा पूर्व में कांडा की एमडीएलआर एयरलाइंस में कार्यरत थी। गीतिका ने चार/पांच अगस्त 2012 की रात को अपने अशोक वहिार स्थित घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। स्युसाइड नोट में गीतिका ने कांडा व चड्ढा पर प्रताडिम्त करने का आरोप लगाया था। इस घटना के बाद गीतिका की मां अनुराधा शर्मा ने भी इसी वर्ष फरवरी में आत्महत्या कर ली थी। मृत्युपूर्व लिखे स्युसाइट नोट में अनुराधा ने भी अपनी मौत के लिए गोपाल कांडा को ही जिम्मेदार ठहराया है।

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