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शारदा ग्रुप के घोटाले ने राजनीतिक विवाद को दिया जन्म

शारदा चिटफंड घोटाला बुधवार को एक राजनीतिक विवाद में बदल गया, जब इस डूबी हुई कंपनी के अध्यक्ष सुदिप्त सेन द्वारा सीबीआई को लिखे गए एक पत्र में तृणमूल कांग्रेस के दो सांसदों के नाम सामने आए। कांग्रेस तथा माकपा ने पार्टी पर ग्रुप के साथ संबंध होने का आरोप लगाया गया।

नुकसान को कम करने की कोशिश के तहत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस डूबी हुई कंपनी के निवेशकों के लिए 500 करोड़ रुपए का राहत कोष बनाने का ऐलान किया।

तृणमूल कांग्रेस के सांसद कुणाल घोष ने जिन्होंने हाल ही में एक टेलीविजन चैनल के मालिक शारदा मीडिया ग्रुप के सीईओ के पद से इस्तीफा दिया था और पार्टी सांसद एवं एक बांग्ला दैनिक के संपादक संजय बोस की घुमा फिराकर चर्चा करते हुए ममता ने कहा कि एक पत्रकार को निशाना बनाया जा रहा है, बहुत से पत्रकार हैं, एक चैनल और एक अखबार के बारे में बताने का कोई अर्थ नहीं है।

उन्होंने माकपा पर जनता से जुड़े एक मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर तृणमूल कांग्रेस के किसी सांसद ने कोई अपराध किया है तो कानून अपना काम करेगा।

संजय बोस ने कहा कि उनके अखबार का चैनल 10 टीवी के साथ 2010 में संपादकीय सहयोग प्रदान करने के लिए पेशेवर गठबंधन था, लेकिन शारदा चिटफंड कंपनी अथवा इसकी किसी शाखा से इसका कोई नाता नहीं था।

शारदा ग्रुप के अध्यक्ष के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हम नहीं जानते थे कि वह आदमी धोखेबाज है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी और शारदा ग्रुप के बीच कोई रिश्ता नहीं हैं।

इस बीच सुदिप्त सेन और शारदा के दो अन्य अधिकारियों को लेकर पश्चिम बंगाल पुलिस कोलकाता रवाना हो गई। इन्हें कल जम्मू कश्मीर के गंदेरबल से गिरफ्तार किया गया था और वहां की अदालत से चार दिन का पारगमन रिमांड मिलने के बाद पुलिस इन्हें दिल्ली के रास्ते यहां लाने के लिए लेकर निकल पड़ी।

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