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आईपीएल 6 जंपिंग झपाक या गिली गिली छू

आईपीएल 6 के आगाज के साथ क्रिकेट फिर से सुर्खियों में आ गया। अखबार की खबरें या हों सोशल साइट्स के अपडेट हर जगह इस आयोजन की चर्चा है। कैसे अलग है इस बार का आइपीएल? बता रहे हैं संजीव कुमार सिंह।

रंगारंग आगाज के बाद इंडियन प्रीमियर लीग छठें संस्करण में मनोरंजन के कई दावों के साथ एक बार फिर तैयार है। देश और विदेश के नामी सितारों ने साल्ट लेक स्टेडियम में जलवे भरी शुरुआत के बाद इस बार अच्छे पैकेज के संकेत दिए हैं। हालांकि ग्लैमरस जेनिफर लोपेज आतीं तो यह शुरुआत और भी जबरदस्त होती। फिर भी  रैपर पिटबुल, शाहरुख खान, कैटरीना कैफ और दीपिका पादुकोण समेत सितारों ने जो समां बांधा वह कई दिनों तक दर्शकों के जेहन में रहेगा। आईपीएल को रोमांचक बनाने के लिए इस ब्रांड से जुड़ी कंपनियां लीग को कामयाब बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। आईपीएल के प्रमोशन के अलावा लीग के विज्ञापन तमाम चैनलों पर हावी हैं। देखना रोचक होगा कि फराह खान द्वाराआम लोगों को नचाए जा रहे प्रमोशनल विज्ञापन की तरह आईपीएल 6 जंपिग झपाक होता है या गिली गिली छू की तरह उड़नछू.!!

बनता, बिगड़ता ब्रांड
क्रिकेट का यह लेटेस्ट ब्रांड शुरुआती संस्करणों के बाद बीच में अपना रंग खोता दिखा। आईपीएल वन की जबरदस्त कामयाबी के बाद इस लीग ने क्रिकेट में जिस तरह तूफानी  बदलावों के संकेत दिए थे उसे देखकर लगा था कि मसाला क्रिकेट का यह चस्का पारंपरिक फॉरमेट यानी टेस्ट और वन-डे पर पूरी तरह हावी हो जाएगा। टी-20 लीग इतना बड़ा ब्रांड बन गया कि इसी की तर्ज पर पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश ने अपने देशों में लीग की घोषणा कर डाली।  इसे देखते हुए आईपीएल के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया और पारंपरिक  क्रिकेट के चाहनेवालों  ने खूब मुहिम छेड़ डाली। लेकिन पिछले दो संस्करणों में आईपीएल को बुरा दौर भी देखना पड़ा। टीमों से जुड़े विवाद , देर रात होने वाली पार्टियां और इसके बाद विदेशी टीमों के हाथों पिटाई ने इस लीग को लेकर जायका कसैला कर दिया। खासकर दो साल पहले वर्ल्ड कप 2011 के तुरंत बाद आईपीएल फ्लॉप शो साबित हुआ। वर्ल्ड कप क्रिकेट की ओवरडोज के बाद स्टेडियम में दर्शक ढूंढे नहीं मिले। तब लगा कि आईपीएल अब बीते दिनों की बात हो जाएगा। आईपीएल चार के तुरंत बाद इंग्लैंड दौरे ने जिस तरह टीम इंडिया की कलई खोली वह भारतीय टीम के लिए किसी सदमे से कम नहीं था। धुरंधर खिलाड़ी  थकान और फिटनेस से जूझते दिखे। पिछली बार यानी आईपीएल 5 थोड़ी रंगत के साथ नजर आया। अमेरिकी स्टार कैटी पैरी की चमकीली परफार्मेंस के बाद कुछ रोमांचक मुकाबलों ने इस लीग की साख बचाई। इस संस्करण में भी यह चुनौती आयोजकों के सामने रहेगी।

युवाओं के लिए मौका
आईपीएल युवाओं को छा जाने का बड़ा मंच देता है। यहां चलने का मतलब है मोटी कमाई, बड़ी कंपनियों से विज्ञापन करार और भारतीय टीम में आने की बड़ी दस्तक। इस बार उन्मुक्त चंद, बाबा अपराजित, हरमीत सिंह और संदीप शर्मा ऐसे युवा सितारे हैं जिनमें क्रिकेट के आकाश पर छा जाने का माद्दा है। आईपीएल के जरिये युवा खिलाड़ियों  को महान क्रिकेटरों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने का मौका भी मिलता है और दिग्गजों के टिप्स उनके लिए खासे अहम साबित हो सकते हैं। इसके अलावा उन्हें अलग ग्राउंड्स और माहौल से रूबरू होने का मौका भी मिलेगा।

एक सीजन के स्टार
युवाओं पर चमकने के दबाव के बीच जमीन से जुड़े रहना भी सीखना होगा। नहीं तो उनका हश्र मनप्रीत गोनी, सौरभ तिवारी, मनीष पांडे, स्वपनिल असनोदकर और पॉल वॉल्थेटी जैसा हो सकता है। ये सभी एक सीजन में चमक बिखेरने के बाद अचानक बुझ-से गए। गोनी ने 2008 में 16 मैचों में 17 विकेट लिए थे लेकिन बाकी सत्रों के कुल 19 मैचों में वह 13 विकेट ही चटका पाए। 2009 में मनीष पांडे आईपीएल में शतक ठोकने वाले पहले खिलाड़ी 2010 में 15 मैचों में 419 रन के साथ तूफानी  प्रदर्शन के बाद सौरभ तिवारी और 2011 में 463 रन बनाने वाले पॉल वाल्थेटी धूमकेत की तरह उभरे। लेकिन इसके बाद ये गायब हो गए।

कमाई का जरिया
इसने कुछ फ्रीलांसर क्रिकेटर भी पैदा किए जो अपने देश के लिए खेलने के बजाय अलग देशों की लीगों में खेलने को ज्यादा तवज्जो देते हैं। टी-20 के सबसे तूफानी बल्लेबाज क्रिस गेल विवाद के बाद वेस्ट इंडीज टीम में जगह मिलने से पहले सिर्फ आईपीएल की बदौलत ही क्रिकेट बिरादरी में जिंदा रह सके। बॉक्सर बनने से पूर्व इंग्लैंड के पूर्व कप्तान एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने खुद को फ्रीलांसर क्रिकेटर घोषित किया था। यही नहीं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रुखसत हो चुके कई बड़े क्रिकेटरों के लिए भी यह रोजी रोटी का बढ़िया जरिया है।

सबसे बड़ा सवाल
आखिर में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आईपीएल वाकई भारतीय क्रिकेट के लिए फायदेमंद है या नुकसानदेह। भले ही भारतीय खिलाड़ी आस्ट्रेलियाई टीम को टेस्ट सिरीज में 4-0 से धराशायी करने के बाद सीना ठोककर मैदान में उतरेंगे। लेकिन इससे ठीक पहले इंग्लैंड टीम के भारत दौरे को याद करना भी जरूरी है जब अंग्रेजों ने भारतीयों की खूब पिटाई लगाई थी। स्पिन गेंदबाजी और यहां की पिचें हमेशा विदेशी टीमों के लिए हौव्वा रही थीं लेकिन आईपीएल में खेलकर वे पिचों और स्पिन खेलने के तरीकों से अच्छी तरह वाकिफ हो गए।

झटके के बाद पटका या आसान नहीं था आगाज
असल में इस रंगबिरंगी लीग का आयोजक बीसीसीआई भी इसे शुरू करने से पहले पारंपरिक क्रिकेट के पैरोकारों की तरह बुरी तरह सहमा हुआ था। इंडियन क्रिकेट लीग यानी आईसीएल की ओर खिलाड़ियों का रुझान उसे चिंतित कर रहा था।  डर था कि कहीं पारंपरिक क्रिकेट में अच्छे खिलाड़ियों का अकाल न पड़ जाए। पूर्व आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी की तरह एक और मोदी यानी हिमांशु मोदी ने कपिल देव के साथ आईसीएल की शुरुआत कर सभी की नींद उड़ा दी थी। लेकिन इस पर बीसीसीआई के दबाव में आईसीसी ने बागी लीग का ठप्पा लगा दिया। युवा क्रिकेटरों के आईसीएल की ओर झुकाव को देखते हुए बीसीसीआई ने इसी की तर्ज पर नया फॉर्मेट तैयार किया। जो कहीं ज्यादा व्यापक रिसर्च के बाद तैयार हुआ। इसमें ग्लैमर का तड़का जोड़ा गया। बॉलीवुड के सितारे लीग का हिस्सा बने और क्रिकेट में मस्ती और मजे का नया फॉर्मेट तैयार किया। जो पांच साल के सफर के बाद कामयाबी की नई इबारत लिखने में जरूर सफल रहा है।

 

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