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दिमागी बुखार का इलाज करने वाले अस्पताल पर संकट

पूर्वी उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दशक से दिमागी बुखार के मरीजों का इलाज करने के लिए एकमात्र उच्चस्तरीय बाबा राघवदास मेडिकल कालेज पर अब डांक्टरों की कमी का नया संकट मंडरा रहा है।

मेडिकल कालेज के वरिष्ठ चिकित्सकों के अगले दो माह में सेवानिवृत्ति होने के बाद नया संकट खडा हो जाएगा। आगामी मई तक कालेज के छह वरिष्ठ चिकित्सकों के सेवानिवृत्ति होने तथा तीन चिकित्सकों के लखनऊ के राम मनोहर लोहिया संयुक्त अस्पताल में स्थानान्तरण के बाद एक तरह से बाबा राघवदास मेडिकल कालेज वरिष्ठ चिकित्सकों से खाली हो जाएगा।

नए चिकित्सकों के भर्ती का भी अभी तक कोई प्रस्ताव नहीं किया गया है। आगामी जून के बाद बरसात के साथ दिमागी बुखार के कीटाणु पूरी तरह से सक्रिय हो जाते हैं। यही समय होता है जब पूर्वी उत्तर प्रदेश के जापानीज इन्सेफेलाइटिसऔर ए.ईएस. प्रभावित 20 जिलों से मरीज भारी संख्या में इस मेडिकल कालेज में भर्ती होते हैं मगर अब वह यहां आएंगे तो डाक्टरों की कमी महसूस करेंगे।

बाबा राघवदास मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डां. मुकुल मिश्र दो दिन पूर्व राम मनोहर लोहिया मेडिकल कालेज में जा चुके हैं और जाने माने न्यूरोलाजिस्ट डां. ए.के. ठक्कर समेत कई अन्य लोग भी दूसरे अस्पतालों में जाने वाले हैं। मेडिकल कालेज के प्राचार्य डां. के.पी. कुशवाहा के आग्रह पर डां. ठक्कर कुछ दिनों के लिए यहां ठहर गए हैं। उनसे मेडिसिन विभाग का विभागाध्यक्ष का पद संभालने का आग्रह किया गया है।

दिमागी बुखार के बचाव एवं इलाज के पुख्ता इंतजाम के अभाव में इस बीमारी के भयानक कहर से सबक लेते हुए इस बार सरकार ने समय रहते महामारी से निपटने की पहल शुरू कर दी है। इस पर न केवल बरसात के पहले काबू की तैयारी शुरू कर दी गई है बल्कि स्वास्थ्य विभाग के साथ कई दूसरे विभागों को भी इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है और इसके लिए मुख्य सचिव ने सम्बन्धित विभाग को सभी कार्य आगामी 30 जून के पहले पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

खराब फांगिंग मशीन के चलते हर बार बरसात में मच्छरों पर नियंत्रण में दिक्कत आती थी। इस बार 14855 वेकिल माउंटेड फांगिंग मशीन, 14855 पोर्टेबल फागिंग मशीन तथा इसके साथ मैलाथियान खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के लिए गोरखपुर और बस्ती मंडल के सात जिलों में 18882 इंडिया मार्का हैंडपंप लगाने तथा मिनी जल संपूर्ति योजना के तहत 3357 उपकरण लगाने के निर्देश दिए गए हैं। पानी की जांच के लिए सम्बन्धित जिलों में वायरोलाजी लैव भी खोले जाएंगे। नगर विकास विभाग को शहरी क्षेत्र में शुद्ध जल आपूर्ति के लिए 24 करोड़ रुपए दिए गए हैं।

पंचायती राज विभाग को निर्मल भारत अभियान के तहत गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़, देवीपाटन, सहारनपुर, लखनऊ व कानपुर मंडलों में दो लाख सात हजार व्यक्तिगत शौचालय बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पशुधन विभाग को सुअर पालकों को चिन्हित कर उनको जागरूक करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके तहत हर जिले में तीन कार्यशाला आयोजित की जाएगी। सुअरों को मच्छरों से दूर रखने के लिए उनके खून का नमूना लेने की भी योजना है इसके लिए सात करोड़ रुपए अवमुक्त किए गए हैं।

मच्छरों का लार्वा खाने वाली गंबूजिया मछली के पालन के लिए एक करोड़ रुपए दिए गए हैं। यह धनराशि गोरखपुर, बस्ती एवं देवीपाटन मंडलों में मछलियों के क्रय, उनके पालन, आवंटन तथा जमीन और तालाब के चयन पर खर्च की जाएगी।

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