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कैदियों का रिकॉर्ड मेंटेन नहीं होने पर हाइकोर्ट नाराज

रांची मुख्य संवाददाता। कैदियों का रिकार्ड सही तरीके से नहीं रखे जाने पर हाइकोर्ट ने नाराजगी जतायी और टिप्पणी में कहा कि राज्य के जेल राम भरोसे हैं।

खासकर प्रोविजनल (औपबंधिक) बेल पर जाने वाले कैदियों का कोई रिकार्ड नहीं है। यही कारण है कि राज्य सरकार के पास इसका आंकड़ा भी नहीं है। प्रोविजनल बेल वाले कैदी जब मन करता है जेल पहुंचते हैं। यह गंभीर मामला है। राज्य सरकार को इस पर गौर करने की जरूरत है। अदालत ने मुख्य सचवि, गृह सचवि को निर्देश दिया कि जेलों में कैदियों का रिकार्ड कंप्यूटरीकृत करें। उनकी तसवीर और फिंगर प्रिंट और सभी जरूरी पहचान रखी जाए। रिकार्ड में एक कॉलम प्रोविजनल बेल का भी रखें।

उस कॉलम में यह अंकित किया जाए, बेल पर कब जाना और लौटना कब है। जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस एस चंद्रशेखर की अदालत ने सभी जिला जज और ट्रायल कोर्ट को भी बेल देते समय प्रोविजनल बेल और लौटने की तिथि का उल्लेख अवश्य करने को कहा है। क्या है मामलामनोरंजन सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए पिछली तिथि को कोर्ट ने सरकार से एक रिपोर्ट मांगी थी। सरकार को यह बताना था कि राज्य में औपबंधिक बेल पर कितने कैदियों को बाहर किए गए हैं।

कितने लौट कर आए हैं। लेकिन राज्य सरकार ने रिपोर्ट नहीं सौंपी और कोई जवाब भी दाखिल नहीं किया। जेलर हुए तलबसुनवाई के दौरान कोर्ट ने बिरसा मुंडा कारा के जेलर को बुलाया। उनसे पूछा कि प्रोविजनल बेल वाले कैदी समय पर क्यों नहीं आते। जेलर ने बताया कि वह कोर्ट के आदेश के बाद कैदियों को रिहा करते हैं। प्रोविजनल बेल वाले कैदियों को अस्थायी तौर पर रिहा करने का जिक्र उस पर नहीं होता और न ही उनकी वापसी की तिथि ही रहती है।

इस कारण जब वह आते हैं तो उसे नए कैदी की तरह रखा जाता है। इस पर कोर्ट ने अदालतों को इसका उल्लेख करने को कहा। जेलर को कहा कि यदि समय पर कैदी वापस नहीं आए तो इसकी सूचना कोर्ट को दें।

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