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पत्नी बेवफा मान की आत्महत्या, अदालत ने किया बरी

नई दिल्ली हेमलता कौशिक

एक महिला ने पति को किसी और महिला के साथ देखकर आत्महत्या कर ली। मृत्युपूर्व लिखे गए स्युसाइड नोट में महिला ने पति की बेवफाई का जिक्र किया। परन्तु अदालत ने महिला को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से पति को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा है कि महिला द्वारा यह कदम आवेश में उठाया गया। अगर उसे पति पर संदेह था तो इसके लिए अन्य रास्ते भी तलाशे जा सकते थे। हालातों को ध्यान में रखते हुए अदालत पति को इस मामले से बरी करती है।

रोहिणी स्थित एडशिनल सेशन जज राकेश तिवारी की अदालत ने आरोपी करमवीर को बरी कर दिया है। इसके अलावा अदालत ने करमवीर के परिवार के पांच अन्य सदस्यों को भी दहेज प्रताड़ना और दहेज हत्या के आरोप से बरी किया है। अदालत ने कहा है कि मृतका सुषमा ने स्युसाइड नोट में कहीं भी सीधे तौर पर आरोपी करमवीर उर्फ सोनू पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप नहीं लगाया है। नोट में लिखा है कि उसने सोनू को किसी महिला के साथ देखा।

साथ ही नोट के आखिर में मृतका ने पति के प्रति प्यार भी जाहिर किया है। लिहाजा अदालत को आरोपी को दोषी ठहराने की कोई वजह नजर नहीं आ रही है। एक साल पहले महिला ने की थी आत्महत्या23 जनवरी 2012 को सुषमा ने अपने बवाना स्थित घर में पंखे से लटकर आत्महत्या कर ली थी। मामले की शिकायतकर्ता सुषमा की मां कमला ने बताया था कि उनकी बेटी की शादी चार साल पहले हुई थी। उनकी बेटी के दो बच्चों भी हैं।

ससुराल वाले उसे दहेज के लिए प्रताडिम्त किया करते थे। जिससे तंग आकर उनकी बेटी को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा। माता-पिता बयानों से मुकरेमृतका की मां कमला ने इस मामले में बवाना थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। परन्तु अदालत में बयान दर्ज कराते हुए कमला और उनके पति गुलाब सिंह पूर्व के बयानों से मुकर गए। उनका कहना था कि उनकी बेटी को ससुराल में दहेज के लिए प्रताडिम्त नहीं किया जा रहा था। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि सुषमा ने उनके दामाद को किसी और महिला के साथ देख लिया था।

इसी से आहत होकर उसने ऐसा कदम उठाया। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट फैसले को बनाया आधारअदालत ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के वर्ष 2000 के फैसले को आधार बनाते हुए कहा कि इस मामले में एक व्यक्ति ने पत्नी के चरित्र पर संदेह होने के चलते आत्महत्या कर ली थी। जिसमें माना गया था कि अगर पति को पत्नी के चरित्र पर शक था तो उसे इसे साबित करना चाहिए था न कि आत्महत्या करनी चाहिए थी। चूंकि इसमें महिला का कोई कसूर नहीं है इसलिए पत्नी को बरी किया जाता है।

अदालत ने इसी निर्णय को विचार में रखते हुए करमवीर को पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से बरी किया है।

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